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8 Apr 2020 · 1 min read

दोहे नौकरशाही

वेतन थकती सीढियाँ, मजदूरी बेहाल
तेज़ लिफ़्ट से है बड़ी, महँगाई की चाल

तन खाये जो रात दिन, कहलाये तनख़ाह
पूरनमासी चाँद है, माह में एक—आह!!

हम तो नौकर आपके, सुनते हो सरकार
करें महीना चाकरी, एक दिन लें पगार

चाय पिये कैंटीन में, महावीर कविराज
कम्पनी के ग़ुलाम हैं, सिर पे तख़्त न ताज

Language: Hindi
Tag: दोहा
1 Like · 352 Views
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