Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Feb 2017 · 1 min read

देह कम्पित यूँ हुई मधुमास से

गण रहित 20 मात्रिक छंद
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷

देह कम्पित यूँ हुई मधुमास से।
आया ज्यूँ भूकम्प कोई पास से।

आ ही जब मधुकर गया यूँ सामने।
तो छूटा पनघट पर कलश पाश से।

प्रीत का पानी जो था घट में भरा।
बून्द बून्द झरने लगा मन त्रास से।

धरा देह की यह थरथराने लगी ।
मिल गई जब श्वासें ‘मधु’की साँस से।

हया भी झरी फिर पनघटी नीर सी।
खिल गया हर रोम ज्यूँ हरी घांस से।

फिर गया भूकम्प बस हिला कर मनो।
मिट गया गुरुर सारा ज्यूँ विनाश से।

वक्त को गुजरना था गुज़र ही गया।
प्रीती ही तकती रही बस आस से।

सपना था यह या मन बना बावरा।
पर खिल गई थी आत्मा परिहास से।

(C) ** मधुसूदन गौतम

Language: Hindi
Tag: गीत
249 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
है बुद्ध कहाँ हो लौट आओ
है बुद्ध कहाँ हो लौट आओ
VINOD CHAUHAN
किसी ने कहा- आरे वहां क्या बात है! लड़की हो तो ऐसी, दिल जीत
किसी ने कहा- आरे वहां क्या बात है! लड़की हो तो ऐसी, दिल जीत
जय लगन कुमार हैप्पी
मन को भाये इमली. खट्टा मीठा डकार आये
मन को भाये इमली. खट्टा मीठा डकार आये
Ranjeet kumar patre
कविता: मेरी अभिलाषा- उपवन बनना चाहता हूं।
कविता: मेरी अभिलाषा- उपवन बनना चाहता हूं।
Rajesh Kumar Arjun
गुलाम
गुलाम
Punam Pande
#गीत
#गीत
*प्रणय प्रभात*
Dear me
Dear me
पूर्वार्थ
।। सुविचार ।।
।। सुविचार ।।
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
हे ! भाग्य विधाता ,जग के रखवारे ।
हे ! भाग्य विधाता ,जग के रखवारे ।
Buddha Prakash
2. *मेरी-इच्छा*
2. *मेरी-इच्छा*
Dr Shweta sood
साहित्य का बुनियादी सरोकार +रमेशराज
साहित्य का बुनियादी सरोकार +रमेशराज
कवि रमेशराज
रामपुर में काका हाथरसी नाइट
रामपुर में काका हाथरसी नाइट
Ravi Prakash
अधूरी ख्वाहिशें
अधूरी ख्वाहिशें
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
माँ के लिए बेटियां
माँ के लिए बेटियां
लक्ष्मी सिंह
हमारा ऐसा हो गणतंत्र।
हमारा ऐसा हो गणतंत्र।
सत्य कुमार प्रेमी
शेष न बचा
शेष न बचा
इंजी. संजय श्रीवास्तव
नवरात्रि के इस पवित्र त्योहार में,
नवरात्रि के इस पवित्र त्योहार में,
Sahil Ahmad
मैं ....
मैं ....
sushil sarna
देख के तुझे कितना सकून मुझे मिलता है
देख के तुझे कितना सकून मुझे मिलता है
Swami Ganganiya
केवल “ॐ” कार है
केवल “ॐ” कार है
Neeraj Mishra " नीर "
विरह
विरह
नवीन जोशी 'नवल'
किसने क्या खूबसूरत लिखा है
किसने क्या खूबसूरत लिखा है
शेखर सिंह
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी कई मायनों में खास होती है।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी कई मायनों में खास होती है।
Shashi kala vyas
କୁଟୀର ଘର
କୁଟୀର ଘର
Otteri Selvakumar
बुश का बुर्का
बुश का बुर्का
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
कृपया सावधान रहें !
कृपया सावधान रहें !
Anand Kumar
धैर्य के साथ अगर मन में संतोष का भाव हो तो भीड़ में भी आपके
धैर्य के साथ अगर मन में संतोष का भाव हो तो भीड़ में भी आपके
Paras Nath Jha
"पता नहीं"
Dr. Kishan tandon kranti
कोई क्या करे
कोई क्या करे
Davina Amar Thakral
2731.*पूर्णिका*
2731.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Loading...