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6 Mar 2024 · 1 min read

तृष्णा के अम्बर यहाँ,

तृष्णा के अम्बर यहाँ,
तृप्ति मात्र आभास ।
अवगुंठन में तृप्ति के,
सिर्फ प्यास ही प्यास ।।

सुशील सरना / 6-3-24

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