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11 Feb 2024 · 1 min read

तू फितरत ए शैतां से कुछ जुदा तो नहीं है

तू फितरत ए शैतां से कुछ जुदा तो नहीं है
मत कर गुमां ए इंसा, कि तू खुदा तो नहीं है
डॉ तबस्सुम जहां

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