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21 Mar 2024 · 1 min read

तुम रूबरू भी

तुम रूबरू भी
न हो तो क्या
तसव्वुर
में बना लेता हूँ
आँखे तुम्हारी
और, नशा उनका
ढाल कर लफ्जों में
गज़ल बना लेता हूँ मैं

हिमांशु Kulshrestha

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