Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Feb 2024 · 1 min read

तुम अभी आना नहीं।

शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही।
हर सम्त ही क़यामत है आयी यहाँ तुम अभी आना नही।।1।।

सियासत की है बड़ी मजहब पर इन स्याह सियासतदानों नें।
बंट गया है सारा शहर ही कौमों में तुम अभी आना नही।।2।।

मशहूर था बड़ा खुलूश-ए-मोहब्बत इस शहर के बाशिंदों का।
अब तो अदावत ही अदावत है यहाँ तुम अभी आना नही।।3।।

उजड़ी है सारी की सारी बस्तियाँ ही इंसानियत कहीं दिखती नही।
कोई किसी की ख़ैरियत पूछनें वाला नही तुम अभी आना नही।।4।।

रहते थे बस्ती में जो राम-ओ-रहीम आमने-सामने कभी।
रहते है अब वो मंदिर-ओ-मस्जिद में तुम अभी आना नही।।5।।

हर शू खामोशी का सन्नाटा है पसरा परिंदे भी शज़रो पे आते नही।
उदास है अभी यह शहर ही बहुत तुम अभी आना नही।।6।।

हर खुशी-ओ-गम बांटकर जीने वाले अब हो गए है दुश्मन-ए-जाँ।
जाने मौत कब ले ले आग़ोश में अपनी तुम अभी आना नही।।7।।

वह बूढ़े चाचा अब स्कूल वाली बस अपनी बस्ती में लाते नही।
बच्चों का स्कूल है घर से बहुत ही दूर तुम अभी आना नही।।8।।

ताज मोहम्मद
लखनऊ

51 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जीत के साथ
जीत के साथ
Dr fauzia Naseem shad
मुझे अपनी दुल्हन तुम्हें नहीं बनाना है
मुझे अपनी दुल्हन तुम्हें नहीं बनाना है
gurudeenverma198
■ लघुकथा / रेल की खिड़की
■ लघुकथा / रेल की खिड़की
*Author प्रणय प्रभात*
Ab kya bataye ishq ki kahaniya aur muhabbat ke afsaane
Ab kya bataye ishq ki kahaniya aur muhabbat ke afsaane
गुप्तरत्न
मेरी आरज़ू है ये
मेरी आरज़ू है ये
shabina. Naaz
छप्पन भोग
छप्पन भोग
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
*क्या हाल-चाल हैं ? (हास्य व्यंग्य)*
*क्या हाल-चाल हैं ? (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
विचार, संस्कार और रस-4
विचार, संस्कार और रस-4
कवि रमेशराज
पुस्तक समीक्षा- उपन्यास विपश्यना ( डॉ इंदिरा दांगी)
पुस्तक समीक्षा- उपन्यास विपश्यना ( डॉ इंदिरा दांगी)
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
गाओ शुभ मंगल गीत
गाओ शुभ मंगल गीत
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
रूठकर के खुदसे
रूठकर के खुदसे
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
क्यों गए थे ऐसे आतिशखाने में ,
क्यों गए थे ऐसे आतिशखाने में ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
परिभाषाएं अनगिनत,
परिभाषाएं अनगिनत,
महेश चन्द्र त्रिपाठी
जब तुम नहीं सुनोगे भैया
जब तुम नहीं सुनोगे भैया
DrLakshman Jha Parimal
कानून?
कानून?
nagarsumit326
आख़िरी मुलाकात !
आख़िरी मुलाकात !
The_dk_poetry
एहसास
एहसास
Kanchan Khanna
"सुबह की चाय"
Pushpraj Anant
"एक नाविक सा"
Dr. Kishan tandon kranti
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
शोषण
शोषण
साहिल
- रिश्तों को में तोड़ चला -
- रिश्तों को में तोड़ चला -
bharat gehlot
रिश्तें मे मानव जीवन
रिश्तें मे मानव जीवन
Anil chobisa
दोहा
दोहा
दुष्यन्त 'बाबा'
🔘सुविचार🔘
🔘सुविचार🔘
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
वक्त सा गुजर गया है।
वक्त सा गुजर गया है।
Taj Mohammad
गरीब और बुलडोजर
गरीब और बुलडोजर
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
क्यों ज़रूरी है स्कूटी !
क्यों ज़रूरी है स्कूटी !
Rakesh Bahanwal
23/166.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/166.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मातृ भाषा हिन्दी
मातृ भाषा हिन्दी
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
Loading...