Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Nov 2023 · 1 min read

“तुम्हारे शिकवों का अंत चाहता हूँ

“तुम्हारे शिकवों का अंत चाहता हूँ
कुछ पल के लिए एकांत चाहता हूँ
थक गया हूँ गहमा-गहमी से बहुत
अब जिंदगी बहुत शांत चाहता हूँ”
©दुष्यंत ‘बाबा’

3 Likes · 132 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ख़्वाब आंखों में टूट जाते है
ख़्वाब आंखों में टूट जाते है
Dr fauzia Naseem shad
"चाँद को शिकायत" संकलित
Radhakishan R. Mundhra
वह फूल हूँ
वह फूल हूँ
Pt. Brajesh Kumar Nayak
दुनियां और जंग
दुनियां और जंग
सत्य कुमार प्रेमी
बेचारा जमीर ( रूह की मौत )
बेचारा जमीर ( रूह की मौत )
ओनिका सेतिया 'अनु '
चीत्कार रही मानवता,मानव हत्याएं हैं जारी
चीत्कार रही मानवता,मानव हत्याएं हैं जारी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
*** सैर आसमान की....! ***
*** सैर आसमान की....! ***
VEDANTA PATEL
दु:ख का रोना मत रोना कभी किसी के सामने क्योंकि लोग अफसोस नही
दु:ख का रोना मत रोना कभी किसी के सामने क्योंकि लोग अफसोस नही
Ranjeet kumar patre
*लगे जो प्रश्न सच, उस प्रश्न को उत्तर से हल देना 【मुक्तक】*
*लगे जो प्रश्न सच, उस प्रश्न को उत्तर से हल देना 【मुक्तक】*
Ravi Prakash
रमेशराज के साम्प्रदायिक सद्भाव के गीत
रमेशराज के साम्प्रदायिक सद्भाव के गीत
कवि रमेशराज
जाति आज भी जिंदा है...
जाति आज भी जिंदा है...
आर एस आघात
चंद अशआर
चंद अशआर
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
“पसरल अछि अकर्मण्यता”
“पसरल अछि अकर्मण्यता”
DrLakshman Jha Parimal
स्वभाव
स्वभाव
अखिलेश 'अखिल'
भूमि दिवस
भूमि दिवस
SATPAL CHAUHAN
देशभक्ति जनसेवा
देशभक्ति जनसेवा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
सकारात्मक पुष्टि
सकारात्मक पुष्टि
पूर्वार्थ
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
हर एक शख्स से ना गिला किया जाए
हर एक शख्स से ना गिला किया जाए
कवि दीपक बवेजा
सिर्फ तेरे चरणों में सर झुकाते हैं मुरलीधर,
सिर्फ तेरे चरणों में सर झुकाते हैं मुरलीधर,
कार्तिक नितिन शर्मा
हर राह मौहब्बत की आसान नहीं होती ।
हर राह मौहब्बत की आसान नहीं होती ।
Phool gufran
■ अपना मान, अपने हाथ
■ अपना मान, अपने हाथ
*Author प्रणय प्रभात*
मेरी पहली चाहत था तू
मेरी पहली चाहत था तू
Dr Manju Saini
2894.*पूर्णिका*
2894.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
हमारी संस्कृति में दशरथ तभी बूढ़े हो जाते हैं जब राम योग्य ह
हमारी संस्कृति में दशरथ तभी बूढ़े हो जाते हैं जब राम योग्य ह
Sanjay ' शून्य'
बिना चले गन्तव्य को,
बिना चले गन्तव्य को,
sushil sarna
* बाल विवाह मुक्त भारत *
* बाल विवाह मुक्त भारत *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
शुभ को छोड़ लाभ पर
शुभ को छोड़ लाभ पर
Dr. Kishan tandon kranti
सुरसरि-सा निर्मल बहे, कर ले मन में गेह।
सुरसरि-सा निर्मल बहे, कर ले मन में गेह।
डॉ.सीमा अग्रवाल
अँधेरे में नहीं दिखता
अँधेरे में नहीं दिखता
Anil Mishra Prahari
Loading...