Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 May 2023 · 1 min read

तुम्हारा चश्मा

आज तुम्हारा चश्मा लगाना ही पड़ा हमें..

अधमुंदी आँखों से देख रही थी
अब तक यह दुनिया
चँद चेहरे ही उघड़े थे अभी कि
अब तक तुम्हारी आँखों से
देखी थी दुनिया ।
धुंधली सी नज़र आई यह ज़मीं
तुम्हारी आँखों के बिना ,
कि अब तुम्हारी आँखें साँस नहीं लेती
उन खामोश लबों पर
ज़िन्दगी मुस्कुराती थी कभी
अब टटोलते हाथों में
रूह भी हाथ आती नहीं।

ऐनक तुम्हारी लगाई आज कि
अपने चश्मे से नज़र कुछ आता नहीं
तुम्हारी ऐनक बन गई रोशनी
मेरी कमज़ोर नज़र की
ओझल हुई थी जो दुनिया
एक पल के लिए सामने खड़ी हो गई ।

और खोजे बहुत वो पल
अपनाकर आँखें तुम्हारी
पर बरसों से बँधा सैलाब उमड़ पड़ा था
मानो दो जोड़ी आँखों ने
अपना दुखड़ा कहा था ।

अब इन आँखों के
इंतज़ार की वजहें बदल गई हैं
न तुम्हारी आवाज़ बुलाती है इन्हें
और न पास बिठाती है इन्हें
बस अहसास है कि
रूह आस पास है
तुम्हारी उन जुदा होती आँखों की
उस तड़प की
आज भी ज़िंदा हर साँस है ।

तुम्हारी ऐनक ‘आँखें’ बन गई है हमारी
अच्छा है कि
तुम्हारी उन अनुभवी आँखों का
चश्मा हमारे पास है ।
————डॉ सीमा (copyright)

Language: Hindi
1 Like · 247 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Seema Varma
View all
You may also like:
नौकरी वाली बीबी
नौकरी वाली बीबी
Rajni kapoor
शिव आराध्य राम
शिव आराध्य राम
Pratibha Pandey
जुगनू
जुगनू
Gurdeep Saggu
सच तो रंग होते हैं।
सच तो रंग होते हैं।
Neeraj Agarwal
#ग़ज़ल
#ग़ज़ल
*प्रणय प्रभात*
तड़के जब आँखें खुलीं, उपजा एक विचार।
तड़के जब आँखें खुलीं, उपजा एक विचार।
डॉ.सीमा अग्रवाल
CUPID-STRUCK !
CUPID-STRUCK !
Ahtesham Ahmad
इश्क का बाजार
इश्क का बाजार
Suraj Mehra
कभी कभी प्रतीक्षा
कभी कभी प्रतीक्षा
पूर्वार्थ
2367.पूर्णिका
2367.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
"लोग"
Dr. Kishan tandon kranti
प्रकृति भी तो शांत मुस्कुराती रहती है
प्रकृति भी तो शांत मुस्कुराती रहती है
ruby kumari
कैसे प्रियवर मैं कहूँ,
कैसे प्रियवर मैं कहूँ,
sushil sarna
रख धैर्य, हृदय पाषाण  करो।
रख धैर्य, हृदय पाषाण करो।
अभिनव अदम्य
महापुरुषों की मूर्तियां बनाना व पुजना उतना जरुरी नहीं है,
महापुरुषों की मूर्तियां बनाना व पुजना उतना जरुरी नहीं है,
शेखर सिंह
तेरी जुल्फों के साये में भी अब राहत नहीं मिलती।
तेरी जुल्फों के साये में भी अब राहत नहीं मिलती।
Phool gufran
आगमन राम का सुनकर फिर से असुरों ने उत्पात किया।
आगमन राम का सुनकर फिर से असुरों ने उत्पात किया।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
🌳वृक्ष की संवेदना🌳
🌳वृक्ष की संवेदना🌳
Dr. Vaishali Verma
पलटे नहीं थे हमने
पलटे नहीं थे हमने
Dr fauzia Naseem shad
दशावतार
दशावतार
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
प्रकृति में एक अदृश्य शक्ति कार्य कर रही है जो है तुम्हारी स
प्रकृति में एक अदृश्य शक्ति कार्य कर रही है जो है तुम्हारी स
Rj Anand Prajapati
युद्ध नहीं जिनके जीवन में,
युद्ध नहीं जिनके जीवन में,
Sandeep Mishra
पहला कदम
पहला कदम
प्रकाश जुयाल 'मुकेश'
लू, तपिश, स्वेदों का व्यापार करता है
लू, तपिश, स्वेदों का व्यापार करता है
Anil Mishra Prahari
Indulge, Live and Love
Indulge, Live and Love
Dhriti Mishra
गुनगुनाने यहां लगा, फिर से एक फकीर।
गुनगुनाने यहां लगा, फिर से एक फकीर।
Suryakant Dwivedi
वापस आना वीर
वापस आना वीर
लक्ष्मी सिंह
शिवनाथ में सावन
शिवनाथ में सावन
Santosh kumar Miri
आजकल रिश्तें और मक्कारी एक ही नाम है।
आजकल रिश्तें और मक्कारी एक ही नाम है।
Priya princess panwar
कभी-कभी
कभी-कभी
Ragini Kumari
Loading...