Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Oct 2022 · 1 min read

तितली तेरे पंख

रंग-बिरंगे तितली के पंख,
रस की आस प्यासी भटकन,
सुखी होता है जिससे जीवन,
पाती लिख दी नाम तुम्हारे।

सीमा रेखा छूने को
नित नए-नए सपने सजाती,
उठती गिरती और मरती जाती,
पर मोह न आकाश का तजती,
जीवन की शाम बस नाम तुम्हारे।

मन की पुस्तक के पृष्ठों पर,
अंकित करते हैं तितली के पंख,
इंद्रधनुष की शोभा न्यारी,
लगते हैं जो शिल्पी के घर,
नयनों के दर्पण में,
चित्र बनते बस नाम तुम्हारे।

कूल और धाराओं में
बनते ज्वार के घर
प्राण हमारे थके अकेले
‘अंजुम’ सागर की मोती सीपी
बस करता हूं नाम तुम्हारे

नाम-मनमोहन लाल गुप्ता
मोहल्ला-जाब्तागंज, नजीबाबाद, बिजनौर, यूपी
मोबाइल नंबर 9152859828

Language: Hindi
1 Like · 138 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
View all
You may also like:
गैरों सी लगती है दुनिया
गैरों सी लगती है दुनिया
देवराज यादव
*मीठे बोल*
*मीठे बोल*
Poonam Matia
कोई शुहरत का मेरी है, कोई धन का वारिस
कोई शुहरत का मेरी है, कोई धन का वारिस
Sarfaraz Ahmed Aasee
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
💐प्रेम कौतुक-297💐
💐प्रेम कौतुक-297💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
#शेर-
#शेर-
*Author प्रणय प्रभात*
ममतामयी मां
ममतामयी मां
SATPAL CHAUHAN
वर्तमान गठबंधन राजनीति के समीकरण - एक मंथन
वर्तमान गठबंधन राजनीति के समीकरण - एक मंथन
Shyam Sundar Subramanian
*चुनावी कुंडलिया*
*चुनावी कुंडलिया*
Ravi Prakash
क्षतिपूर्ति
क्षतिपूर्ति
Shweta Soni
ओ चाँद गगन के....
ओ चाँद गगन के....
डॉ.सीमा अग्रवाल
रिटायमेंट (शब्द चित्र)
रिटायमेंट (शब्द चित्र)
Suryakant Dwivedi
ऐसे ना मुझे  छोड़ना
ऐसे ना मुझे छोड़ना
Umender kumar
हिजरत - चार मिसरे
हिजरत - चार मिसरे
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
मां बेटी
मां बेटी
Neeraj Agarwal
हम भी तो चाहते हैं, तुम्हें देखना खुश
हम भी तो चाहते हैं, तुम्हें देखना खुश
gurudeenverma198
*हुई हम से खता,फ़ांसी नहीं*
*हुई हम से खता,फ़ांसी नहीं*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
उम्र के हर पड़ाव पर
उम्र के हर पड़ाव पर
Surinder blackpen
लेखनी को श्रृंगार शालीनता ,मधुर्यता और शिष्टाचार से संवारा ज
लेखनी को श्रृंगार शालीनता ,मधुर्यता और शिष्टाचार से संवारा ज
DrLakshman Jha Parimal
कान्हा
कान्हा
Mamta Rani
3197.*पूर्णिका*
3197.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
हमने माना अभी अंधेरा है
हमने माना अभी अंधेरा है
Dr fauzia Naseem shad
रूठी बीवी को मनाने चले हो
रूठी बीवी को मनाने चले हो
Prem Farrukhabadi
उसकी आंखों से छलकता प्यार
उसकी आंखों से छलकता प्यार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*** हम दो राही....!!! ***
*** हम दो राही....!!! ***
VEDANTA PATEL
मुश्किल से मुश्किल हालातों से
मुश्किल से मुश्किल हालातों से
Vaishaligoel
★
पूर्वार्थ
बेशर्मी
बेशर्मी
Sanjay ' शून्य'
मुझको मेरी लत लगी है!!!
मुझको मेरी लत लगी है!!!
सिद्धार्थ गोरखपुरी
किरणों का कोई रंग नहीं होता
किरणों का कोई रंग नहीं होता
Atul "Krishn"
Loading...