Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Aug 2023 · 1 min read

ताक पर रखकर अंतर की व्यथाएँ,

ताक पर रखकर अंतर की व्यथाएँ,
पीड़ाओं के हृदय पर हास लिख दो।
शुष्क जीवन के द्रवित-ठूंठे -तरु पर,
मधु-मिश्रित मलयमय मधुमास लिख दो।
©ऋतुपर्ण

392 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*मतदान-त्यौहार 【कुंडलिया】*
*मतदान-त्यौहार 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
ना समझ आया
ना समझ आया
Dinesh Kumar Gangwar
शामें दर शाम गुजरती जा रहीं हैं।
शामें दर शाम गुजरती जा रहीं हैं।
शिव प्रताप लोधी
******** रुख्सार से यूँ न खेला करे ***********
******** रुख्सार से यूँ न खेला करे ***********
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
मां
मां
Amrit Lal
💐प्रेम कौतुक-272💐
💐प्रेम कौतुक-272💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
मानवता
मानवता
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
सावन‌....…......हर हर भोले का मन भावन
सावन‌....…......हर हर भोले का मन भावन
Neeraj Agarwal
गुरुकुल शिक्षा पद्धति
गुरुकुल शिक्षा पद्धति
विजय कुमार अग्रवाल
पैसा
पैसा
Sanjay ' शून्य'
"हाथों की लकीरें"
Ekta chitrangini
अधूरेपन की बात अब मुझसे न कीजिए,
अधूरेपन की बात अब मुझसे न कीजिए,
सिद्धार्थ गोरखपुरी
वो खूबसूरत है
वो खूबसूरत है
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
उससे तू ना कर, बात ऐसी कभी अब
उससे तू ना कर, बात ऐसी कभी अब
gurudeenverma198
*** बिंदु और परिधि....!!! ***
*** बिंदु और परिधि....!!! ***
VEDANTA PATEL
आचार, विचार, व्यवहार और विधि एक समान हैं तो रिश्ते जीवन से श
आचार, विचार, व्यवहार और विधि एक समान हैं तो रिश्ते जीवन से श
विमला महरिया मौज
अंधेरी रात में भी एक तारा टिमटिमाया है
अंधेरी रात में भी एक तारा टिमटिमाया है
VINOD CHAUHAN
फूल खिलते जा रहे हैं हो गयी है भोर।
फूल खिलते जा रहे हैं हो गयी है भोर।
surenderpal vaidya
पुश्तैनी दौलत
पुश्तैनी दौलत
Satish Srijan
जन्मदिन पर लिखे अशआर
जन्मदिन पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
गांधी जी के आत्मीय (व्यंग्य लघुकथा)
गांधी जी के आत्मीय (व्यंग्य लघुकथा)
दुष्यन्त 'बाबा'
सब वर्ताव पर निर्भर है
सब वर्ताव पर निर्भर है
Mahender Singh
खून दोगे तुम अगर तो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा
खून दोगे तुम अगर तो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा
Dr Archana Gupta
मनहरण घनाक्षरी
मनहरण घनाक्षरी
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
ज़बानें हमारी हैं, सदियों पुरानी
ज़बानें हमारी हैं, सदियों पुरानी
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मासूमियत
मासूमियत
Punam Pande
जोमाटो वाले अंकल
जोमाटो वाले अंकल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
गल्प इन किश एण्ड मिश
गल्प इन किश एण्ड मिश
प्रेमदास वसु सुरेखा
■ दोहा देव दीवाली का।
■ दोहा देव दीवाली का।
*Author प्रणय प्रभात*
तू ठहर चांद हम आते हैं
तू ठहर चांद हम आते हैं
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
Loading...