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Jun 24, 2016 · 1 min read

!!!!!! ढूँढते हैं !!!!!!!

क्या कयामत आई है दिल-ए दीवाना
तुझे ही ढूँढते हैं कचहरी-ताडीखाना
————————–
हो कहीं तू मिल जा मुझे
लिये फिरता है तेरा शौक मुझे
—————————
खुद की गिरेवां में झांक न सका
खुद को कभी पहचाँ न सका
—————————
करिश्मा भी खुदा, अजीब है यहाँ
खुद को मसीहा सब समझते हैं यहाँ
———————–
छल है कपट है द्वेश दरिद्र है
दिखावा हैं करते मानते पवित्र हैं
———————-
तुम ही ईश हो तुम ही मसीह हो
मत ढूँढो उसे तुम क्यों भयभीत हो
————————-
मानते हैं सब जानते भी सभी हैं
आदत है मजबूर , ढूँढते भी सभी हैं
—————————–
———————————–बृज

2 Likes · 1 Comment · 208 Views
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