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7 Jun 2023 · 1 min read

झोली फैलाए शामों सहर

कर दे रहम रब्बा इक नज़र
झोली फैलाए शामों सहर

टूट जाता है दिल मेरा
ज़माने की बातों से
रोते बिलखते तड़पते हैं
हम न सो सके रातों से

रक्खे हैं हम उम्मीद,सबर
कर दे रहम रब्बा इक नज़र

वक्त मरहम बन जाता है
जीना भी सिखलाता है
ठोकर खाते-खाते इक दिन
मंजिल पास आता है

रहे मजबूत इरादे अगर
कर दे रहम रब्बा इक नज़र

ना शर्म हया है आंखों में
जी रहें बेहयाई से
कुछ भी कर गुजरते है वो
ना डर जगहंसाइ से

न समझाने का कोई असर
कर दे रहम रब्बा इक नज़र

नूर फातिमा खातून “नूरी”
जिला- कुशीनगर
उत्तर प्रदेश
मौलिक स्वरचित

Language: Hindi
Tag: गीत
394 Views
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