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17 Aug 2016 · 1 min read

झूला

एक वृक्ष कटा
साथ ही कट गई
कई आशाएँ
कितने घोंसले
पक्षी निराधार
सहमी चहचहाहट
वो पत्तों की सरसराहट
वो टहनियाँ
जिन पर बाँधते थे
कभी सावन के झूले
बिन झूले सावन
कितना सूना
कटा वृक्ष
वर्षा कम
धरती सूखी
पडी दरारें
न वृक्ष
. न झूला
न सावन ???

Language: Hindi
4 Comments · 507 Views
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