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28 Sep 2016 · 1 min read

जीवन के अंश

मुक्तक
अस्तित्व हीन रहकर भी जो, आश्रय देने वाले हैं।
मरते-मरते जीवन के कुछ, अंश उन्होनें पाले हैं।
गंध विखेरा करते हैं सुंदरता शुचिता शुष्मा की।
परानंद में खो अपना सब, रहते वे मतवाले हैं।
अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ,सबलगढ(म.प्र.)

Language: Hindi
1 Like · 501 Views
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Books from अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
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