Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jul 2019 · 1 min read

जीत-हार

जीत-हार

नेता जी की
वाकपटुता
आडंबरपूर्ण प्रबंधन
शेखियाँ बघारना
झूठे वादे
नकली राष्‍ट्रवाद
जीत गया चुनाव
सौहार्द-सदभाव
नैतिकता
कर्तव्य-परायणता
चुनाव हार गए

-विनोद सिल्‍ला©

Language: Hindi
279 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जरूरत के हिसाब से सारे मानक बदल गए
जरूरत के हिसाब से सारे मानक बदल गए
सिद्धार्थ गोरखपुरी
Humanism : A Philosophy Celebrating Human Dignity
Humanism : A Philosophy Celebrating Human Dignity
Harekrishna Sahu
क्वालिटी टाइम
क्वालिटी टाइम
Dr. Pradeep Kumar Sharma
संयम रख ऐ जिंदगी, बिखर सी गई हू |
संयम रख ऐ जिंदगी, बिखर सी गई हू |
Sakshi Singh
वहाँ से पानी की एक बूँद भी न निकली,
वहाँ से पानी की एक बूँद भी न निकली,
शेखर सिंह
सादगी
सादगी
राजेंद्र तिवारी
हवन
हवन
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
साथी है अब वेदना,
साथी है अब वेदना,
sushil sarna
मौन
मौन
DR ARUN KUMAR SHASTRI
2507.पूर्णिका
2507.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
*कंचन काया की कब दावत होगी*
*कंचन काया की कब दावत होगी*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
कैसे करूँ मैं तुमसे प्यार
कैसे करूँ मैं तुमसे प्यार
gurudeenverma198
हम भी तो देखे
हम भी तो देखे
हिमांशु Kulshrestha
*कविताओं से यह मत पूछो*
*कविताओं से यह मत पूछो*
Dr. Priya Gupta
मुस्कराना
मुस्कराना
Neeraj Agarwal
"यायावरी" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
बिन मांगे ही खुदा ने भरपूर दिया है
बिन मांगे ही खुदा ने भरपूर दिया है
हरवंश हृदय
*हे!शारदे*
*हे!शारदे*
Dushyant Kumar
"The Dance of Joy"
Manisha Manjari
आखिरी अल्फाजों में कहा था उसने बहुत मिलेंगें तेरे जैसे
आखिरी अल्फाजों में कहा था उसने बहुत मिलेंगें तेरे जैसे
शिव प्रताप लोधी
वो ज़िद्दी था बहुत,
वो ज़िद्दी था बहुत,
पूर्वार्थ
ज़िंदगी तेरी हद
ज़िंदगी तेरी हद
Dr fauzia Naseem shad
*तेरा इंतज़ार*
*तेरा इंतज़ार*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
"समय का मूल्य"
Yogendra Chaturwedi
किया है तुम्हें कितना याद ?
किया है तुम्हें कितना याद ?
The_dk_poetry
दोस्ती का मर्म (कविता)
दोस्ती का मर्म (कविता)
Monika Yadav (Rachina)
■ क्यों ना उठे सवाल...?
■ क्यों ना उठे सवाल...?
*प्रणय प्रभात*
बुरे फँसे टिकट माँगकर (हास्य-व्यंग्य)
बुरे फँसे टिकट माँगकर (हास्य-व्यंग्य)
Ravi Prakash
यह आशामय दीप
यह आशामय दीप
Saraswati Bajpai
2) “काग़ज़ की कश्ती”
2) “काग़ज़ की कश्ती”
Sapna Arora
Loading...