Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Feb 2017 · 1 min read

**जिंदगी है दो पल की**

जब से जिंदगी को जाना है,
बस इतना ही पहचाना है ।
जिंदगी है दो पल की,
कभी हंसाएगी,कभी रुलाएगी ।
जब जब हंसाएगी,
दिल में उतर जाएगी ।
मगर जब भी रुलाएगी,
दिल से उतर जाएगी ।
कुछ ना कहकर भी,
बहुत कुछ कह जाएगी ।
कुछ कड़वी,कुछ मीठी,
ना बिसरने वाली,
यादें छोड़ जाएगी ।
कुछ उम्मीदें,कुछ चाहतें,
जिंदगी जीने का,
अरमान जगायेंगी ।
अपनों के साथ जिंदगी,
हर गम में मुस्कुराएगी ।
गम हो चाहे कितना भी बड़ा,
खुशियों की उम्मीद,जीना सिखाएगी ।
टूट कर बिखर न जाना,
हौले से ये कान में कह जाएगी ।
जिंदगी बुझी हुई उम्मीद को,
फिर से जगा जाएगी ।
जीवन के सफर की,
हर मुश्किल खोखली नजर आएगी ।
अगर समझ गए जिंदगी की पहेली,
जिंदगी हर हाल में गुनगुनाएगी ।
जब से जिंदगी को जाना है,
बस इतना ही पहचाना है ।

Language: Hindi
Tag: कविता
4 Likes · 4 Comments · 1687 Views

Books from Neelam Chaudhary

You may also like:
जिन्दगी है की अब सम्हाली ही नहीं जाती है ।
जिन्दगी है की अब सम्हाली ही नहीं जाती है ।
Buddha Prakash
प्रेरक कथा- *हिसाब भगवान रखते हैं-
प्रेरक कथा- *हिसाब भगवान रखते हैं-
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
हिजाब विरोधी आंदोलन
हिजाब विरोधी आंदोलन
Shekhar Chandra Mitra
जो भी कहा है उसने.......
जो भी कहा है उसने.......
कवि दीपक बवेजा
फौजी बनना कहाँ आसान है
फौजी बनना कहाँ आसान है
Anamika Singh
जो व्यर्थ गया खाली खाली,अब भरने की तैयारी है
जो व्यर्थ गया खाली खाली,अब भरने की तैयारी है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
झील के ठहरे पानी में,
झील के ठहरे पानी में,
Satish Srijan
Writing Challenge- स्वास्थ्य (Health)
Writing Challenge- स्वास्थ्य (Health)
Sahityapedia
दो फूल खिले खिलकर आपस में चहकते हैं
दो फूल खिले खिलकर आपस में चहकते हैं
Shivkumar Bilagrami
மர்மம்
மர்மம்
Shyam Sundar Subramanian
खूबसूरती
खूबसूरती
जय लगन कुमार हैप्पी
ज़र्फ़ तेरा अगर
ज़र्फ़ तेरा अगर
Dr fauzia Naseem shad
अभागीन ममता
अभागीन ममता
ओनिका सेतिया 'अनु '
🌷🧑‍⚖️हिंदी इन माय इंट्रो🧑‍⚖️⚘️
🌷🧑‍⚖️हिंदी इन माय इंट्रो🧑‍⚖️⚘️
Ankit Halke jha
रात
रात
अंजनीत निज्जर
*हटरी (बाल कविता)*
*हटरी (बाल कविता)*
Ravi Prakash
फिक्र (एक सवाल)
फिक्र (एक सवाल)
umesh mehra
बादल  खुशबू फूल  हवा  में
बादल खुशबू फूल हवा में
shabina. Naaz
✍️अस्तित्वाच्या पाऊलखुणा
✍️अस्तित्वाच्या पाऊलखुणा
'अशांत' शेखर
क़फ़स
क़फ़स
मनोज कर्ण
अकेले-अकेले
अकेले-अकेले
Rashmi Sanjay
■ सामयिक व्यंग्य / गुस्ताखी माफ़
■ सामयिक व्यंग्य / गुस्ताखी माफ़
*Author प्रणय प्रभात*
माफ़ी नहीं होती
माफ़ी नहीं होती
Surinder blackpen
गुफ्तगू की अहमियत ,                                       अब क्या ख़ाक होगी ।
गुफ्तगू की अहमियत , अब क्या ख़ाक होगी ।
सुशील कुमार सिंह "प्रभात"
"वो अक्स "
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
कुंडलिया छंद
कुंडलिया छंद
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
सिर्फ टी डी एस काट के!
सिर्फ टी डी एस काट के!
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
प्लेटफॉर्म
प्लेटफॉर्म
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
💐संसारस्य संयोगः पान्थसंगम:💐
💐संसारस्य संयोगः पान्थसंगम:💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
मुक्तक
मुक्तक
सूर्यकांत द्विवेदी
Loading...