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17 Feb 2024 · 1 min read

ज़िंदगी ने अब मुस्कुराना छोड़ दिया है

ज़िंदगी ने अब मुस्कुराना छोड़ दिया है
हंसी के मुखौटो को ग़म ने तोड़ दिया है
फुर्सत से बैठी है उदासी ज़िंदगी में
ग़म-ए-हयात ने भी अब रिश्ता जोड़ दिया है

1 Like · 223 Views
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