Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 Mar 2024 · 1 min read

ज़िंदगी का खेल है, सोचना समझना

ज़िंदगी का खेल है, सोचना समझना
हर बात को सोचना समझना, मथना सहेजना,
यह तो ज़िंदगी का खेल है,
जिसमें जीत है, हार है,और हर पल नया सवाल है।

Overthinking कहते हैं इसे आज कल,पर मैं कहता हूँ,
यह तो ज़िंदगी का सार है,जिसमें हर पल नया अनुभव है।

ज़रूरत है सिर्फ संतुलन की,सोचने की, समझने की,
और फिर छोड़ देने की,जो चीज़ें बस बेकार हैं।

Overthinking से डरना नहीं चाहिए,यह तो ज़िंदगी को समझने का रास्ता है,
बस ज़रूरत है,सही दिशा में इसका इस्तेमाल करने की।

ज़िंदगी के हर पल का आनंद लें,सोचें, समझें, और फिर आगे बढ़ें,
यही तो ज़िंदगी का खेल है,जिसमें हर पल नया सफर है।

82 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
फितरत
फितरत
Kanchan Khanna
दिल का रोग
दिल का रोग
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
Stop use of Polythene-plastic
Stop use of Polythene-plastic
Tushar Jagawat
"उदास सांझ"
Dr. Kishan tandon kranti
युद्ध के स्याह पक्ष
युद्ध के स्याह पक्ष
Aman Kumar Holy
छह ऋतु, बारह मास हैं, ग्रीष्म-शरद-बरसात
छह ऋतु, बारह मास हैं, ग्रीष्म-शरद-बरसात
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मंत्र: पिडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
मंत्र: पिडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
Harminder Kaur
हमने देखा है हिमालय को टूटते
हमने देखा है हिमालय को टूटते
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
परिवर्तन
परिवर्तन
विनोद सिल्ला
जीवन की परिभाषा क्या ?
जीवन की परिभाषा क्या ?
Dr fauzia Naseem shad
शिकवा नहीं मुझे किसी से
शिकवा नहीं मुझे किसी से
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
#लघुकथा
#लघुकथा
*प्रणय प्रभात*
आप और हम जीवन के सच
आप और हम जीवन के सच
Neeraj Agarwal
O YOUNG !
O YOUNG !
SURYA PRAKASH SHARMA
जिंदगी का मुसाफ़िर
जिंदगी का मुसाफ़िर
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
किसी ने आंखें बंद की,
किसी ने आंखें बंद की,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
हरित - वसुंधरा।
हरित - वसुंधरा।
Anil Mishra Prahari
प्यार को शब्दों में ऊबारकर
प्यार को शब्दों में ऊबारकर
Rekha khichi
इश्क़ का दामन थामे
इश्क़ का दामन थामे
Surinder blackpen
बेटी और प्रकृति
बेटी और प्रकृति
लक्ष्मी सिंह
ऋतु परिवर्तन
ऋतु परिवर्तन
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
मन की परतों में छुपे ,
मन की परतों में छुपे ,
sushil sarna
ढोलकों की थाप पर फगुहा सुनाई दे रहे।
ढोलकों की थाप पर फगुहा सुनाई दे रहे।
सत्य कुमार प्रेमी
23/43.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/43.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
* लोकतंत्र महान है *
* लोकतंत्र महान है *
surenderpal vaidya
चार दिन की जिंदगानी है यारों,
चार दिन की जिंदगानी है यारों,
Anamika Tiwari 'annpurna '
*तितली (बाल कविता)*
*तितली (बाल कविता)*
Ravi Prakash
तर्क-ए-उल्फ़त
तर्क-ए-उल्फ़त
Neelam Sharma
कोई हंस रहा है कोई रो रहा है 【निर्गुण भजन】
कोई हंस रहा है कोई रो रहा है 【निर्गुण भजन】
Khaimsingh Saini
जन्म गाथा
जन्म गाथा
विजय कुमार अग्रवाल
Loading...