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May 20, 2022 · 1 min read

जब भी देखा है दूर से देखा

ग़ज़ल
जब भी देखा है दूर से देखा
तुमने मुझको ग़ुरूर से देखा

दोनों की ही ख़ता बराबर थी
सिर्फ़ मुझको क़ुसूर से देखा

तुझको छोटा दिखाई देता हूँ
क्या मुझे कोह-ए-तूर से देखा?

मुझमें मज़हब दिखाई देता तुझे
यानी तूने फ़ुतूर से देखा

घूर कर वो ‘अनीस’ देखते हैं
हमने देखा! शुऊर से देखा
-अनीस शाह ‘अनीस’

कोह-ए-तूर =एक पहाड़ का नाम

1 Like · 2 Comments · 53 Views
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