Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 May 2022 · 1 min read

जब भी देखा है दूर से देखा

ग़ज़ल
जब भी देखा है दूर से देखा
तुमने मुझको ग़ुरूर से देखा

दोनों की ही ख़ता बराबर थी
सिर्फ़ मुझको क़ुसूर से देखा

तुझको छोटा दिखाई देता हूँ
क्या मुझे कोह-ए-तूर से देखा?

मुझमें मज़हब दिखाई देता तुझे
यानी तूने फ़ुतूर से देखा

घूर कर वो ‘अनीस’ देखते हैं
हमने देखा! शुऊर से देखा
-अनीस शाह ‘अनीस’

कोह-ए-तूर =एक पहाड़ का नाम

3 Likes · 2 Comments · 374 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
परछाइयों के शहर में
परछाइयों के शहर में
Surinder blackpen
गांव की याद
गांव की याद
Punam Pande
श्री राम का अन्तर्द्वन्द
श्री राम का अन्तर्द्वन्द
Paras Nath Jha
*यार के पैर  जहाँ पर वहाँ  जन्नत है*
*यार के पैर जहाँ पर वहाँ जन्नत है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
#drarunkumarshastri♥️❤️
#drarunkumarshastri♥️❤️
DR ARUN KUMAR SHASTRI
"चिढ़ अगर भीगने से है तो
*Author प्रणय प्रभात*
चाहता है जो
चाहता है जो
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
हिन्दी दोहा बिषय- कलश
हिन्दी दोहा बिषय- कलश
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
सुखी होने में,
सुखी होने में,
Sangeeta Beniwal
मेघ
मेघ
Rakesh Rastogi
💐अज्ञात के प्रति-108💐
💐अज्ञात के प्रति-108💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
उलझ नहीं पाते
उलझ नहीं पाते
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
* राह चुनने का समय *
* राह चुनने का समय *
surenderpal vaidya
(15)
(15) " वित्तं शरणं " भज ले भैया !
Kishore Nigam
सुनो पहाड़ की....!!! (भाग - १०)
सुनो पहाड़ की....!!! (भाग - १०)
Kanchan Khanna
प्रेम मे धोखा।
प्रेम मे धोखा।
Acharya Rama Nand Mandal
तुमसे बेहद प्यार करता हूँ
तुमसे बेहद प्यार करता हूँ
हिमांशु Kulshrestha
मेरी गोद में सो जाओ
मेरी गोद में सो जाओ
Buddha Prakash
रात के सितारे
रात के सितारे
Neeraj Agarwal
आरजू
आरजू
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बदलते रिश्ते
बदलते रिश्ते
Sanjay ' शून्य'
हाँ, ये आँखें अब तो सपनों में भी, सपनों से तौबा करती हैं।
हाँ, ये आँखें अब तो सपनों में भी, सपनों से तौबा करती हैं।
Manisha Manjari
संवेदनहीन प्राणियों के लिए अपनी सफाई में कुछ कहने को होता है
संवेदनहीन प्राणियों के लिए अपनी सफाई में कुछ कहने को होता है
Shweta Soni
ना आसमान सरकेगा ना जमीन खिसकेगी।
ना आसमान सरकेगा ना जमीन खिसकेगी।
लोकेश शर्मा 'अवस्थी'
एक खूबसूरत पिंजरे जैसा था ,
एक खूबसूरत पिंजरे जैसा था ,
लक्ष्मी सिंह
जो कुछ भी है आज है,
जो कुछ भी है आज है,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
2475.पूर्णिका
2475.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
*मूलत: आध्यात्मिक व्यक्तित्व श्री जितेंद्र कमल आनंद जी*
*मूलत: आध्यात्मिक व्यक्तित्व श्री जितेंद्र कमल आनंद जी*
Ravi Prakash
"फ़िर से आज तुम्हारी याद आई"
Lohit Tamta
आजादी का
आजादी का "अमृत महोत्सव"
राकेश चौरसिया
Loading...