Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Jan 2024 · 1 min read

जब पीड़ा से मन फटता है

जब पीड़ा से मन फटता है
बुनने वाला कोई ना हो
दिल के टुकड़े बिखरे हो
चुनने वाला कोई ना हो
जब दर्द शब्द में ढल कर भी
कंठ के अंदर सिमटा है
जब लब कहने को आतुर हो
सुनने वाला कोई ना हो
जब मन किं पीडा आंखो के राहो से बहती है
मै हल्का होता रहता हु
और सुनियार कायर कहती है।

573 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
एक सत्य यह भी
एक सत्य यह भी
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
"हमारे दर्द का मरहम अगर बनकर खड़ा होगा
आर.एस. 'प्रीतम'
मिसाल
मिसाल
Kanchan Khanna
वीरवर (कारगिल विजय उत्सव पर)
वीरवर (कारगिल विजय उत्सव पर)
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
कोई दुनिया में कहीं भी मेरा, नहीं लगता
कोई दुनिया में कहीं भी मेरा, नहीं लगता
Shweta Soni
बैठी रहो कुछ देर और
बैठी रहो कुछ देर और
gurudeenverma198
चांद सितारे टांके हमने देश की तस्वीर में।
चांद सितारे टांके हमने देश की तस्वीर में।
सत्य कुमार प्रेमी
मुझे याद आता है मेरा गांव
मुझे याद आता है मेरा गांव
Adarsh Awasthi
Insaan badal jata hai
Insaan badal jata hai
Aisha Mohan
*पापी पेट के लिए *
*पापी पेट के लिए *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
"रंग भले ही स्याह हो" मेरी पंक्तियों का - अपने रंग तो तुम घोलते हो जब पढ़ते हो
Atul "Krishn"
"जरा सोचिए"
Dr. Kishan tandon kranti
"स्वतंत्रता दिवस"
Slok maurya "umang"
बल से दुश्मन को मिटाने
बल से दुश्मन को मिटाने
Anil Mishra Prahari
मनुष्य
मनुष्य
Sanjay ' शून्य'
*सुंदर दिखना अगर चाहते, भजो राम का नाम (गीत)*
*सुंदर दिखना अगर चाहते, भजो राम का नाम (गीत)*
Ravi Prakash
औरत का जीवन
औरत का जीवन
Dheerja Sharma
हमको इतनी आस बहुत है
हमको इतनी आस बहुत है
Dr. Alpana Suhasini
अक्ल के दुश्मन
अक्ल के दुश्मन
Shekhar Chandra Mitra
गम के बगैर
गम के बगैर
Swami Ganganiya
होटल में......
होटल में......
A🇨🇭maanush
ये कैसा घर है. . . .
ये कैसा घर है. . . .
sushil sarna
आप सभी को नववर्ष की हार्दिक अनंत शुभकामनाएँ
आप सभी को नववर्ष की हार्दिक अनंत शुभकामनाएँ
डॉ.सीमा अग्रवाल
आजकल की औरते क्या क्या गजब ढा रही (हास्य व्यंग)
आजकल की औरते क्या क्या गजब ढा रही (हास्य व्यंग)
Ram Krishan Rastogi
हार नहीं होती
हार नहीं होती
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
स्याही की मुझे जरूरत नही
स्याही की मुझे जरूरत नही
Aarti sirsat
आज उम्मीद है के कल अच्छा होगा
आज उम्मीद है के कल अच्छा होगा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
*छ्त्तीसगढ़ी गीत*
*छ्त्तीसगढ़ी गीत*
Dr.Khedu Bharti
कभी
कभी
हिमांशु Kulshrestha
*** सिमटती जिंदगी और बिखरता पल...! ***
*** सिमटती जिंदगी और बिखरता पल...! ***
VEDANTA PATEL
Loading...