Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Nov 2022 · 1 min read

*छोड़ो मांसाहार (मुक्तक)*

छोड़ो मांसाहार (मुक्तक)
—————————————————-
सब जीवों पर दया करो ,मत मारो उनको खाओ
जिओ और जीने दो का, पथ जीवन में अपनाओ
छोड़ो माँसाहार, अन्न-सब्जी-फल की बहुतायत
दूध गाय का पिओ ,देह मन निर्मल शान्त बनाओ
—————————————————-
रचयिताः रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा ,रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

Language: Hindi
90 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
बट विपट पीपल की छांव 🐒🦒🐿️🦫
बट विपट पीपल की छांव 🐒🦒🐿️🦫
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
बेटी
बेटी
Sushil chauhan
"ओट पर्दे की"
Ekta chitrangini
फागुन (मतगयंद सवैया छंद)
फागुन (मतगयंद सवैया छंद)
संजीव शुक्ल 'सचिन'
जो माता पिता के आंखों में आसूं लाए,
जो माता पिता के आंखों में आसूं लाए,
ओनिका सेतिया 'अनु '
चाहती हूं मैं
चाहती हूं मैं
Divya Mishra
हर चाह..एक आह बनी
हर चाह..एक आह बनी
Priya princess panwar
💐प्रेम कौतुक-431💐
💐प्रेम कौतुक-431💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
मुक्तक
मुक्तक
दुष्यन्त 'बाबा'
अजब-गजब नट भील से, इस जीवन के रूप
अजब-गजब नट भील से, इस जीवन के रूप
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
कविता -
कविता - "सर्दी की रातें"
Anand Sharma
■ आज का शेर
■ आज का शेर
*Author प्रणय प्रभात*
मुझे अपनी दुल्हन तुम्हें नहीं बनाना है
मुझे अपनी दुल्हन तुम्हें नहीं बनाना है
gurudeenverma198
अगर प्यार  की राह  पर हम चलेंगे
अगर प्यार की राह पर हम चलेंगे
Dr Archana Gupta
किरदार हो या
किरदार हो या
Mahender Singh
दिल के जख्म
दिल के जख्म
Gurdeep Saggu
आजमाइश
आजमाइश
Suraj Mehra
बेचैनी तब होती है जब ध्यान लक्ष्य से हट जाता है।
बेचैनी तब होती है जब ध्यान लक्ष्य से हट जाता है।
Rj Anand Prajapati
जो चाहने वाले होते हैं ना
जो चाहने वाले होते हैं ना
पूर्वार्थ
मौन
मौन
निकेश कुमार ठाकुर
*बूढ़ा दरख्त गाँव का *
*बूढ़ा दरख्त गाँव का *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
दुख वो नहीं होता,
दुख वो नहीं होता,
Vishal babu (vishu)
जिन्दगी कभी नाराज होती है,
जिन्दगी कभी नाराज होती है,
Ragini Kumari
मन पतंगा उड़ता रहे, पैच कही लड़जाय।
मन पतंगा उड़ता रहे, पैच कही लड़जाय।
Anil chobisa
आईना अब भी मुझसे
आईना अब भी मुझसे
Satish Srijan
2554.पूर्णिका
2554.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
स्वतंत्रता और सीमाएँ - भाग 04 Desert Fellow Rakesh Yadav
स्वतंत्रता और सीमाएँ - भाग 04 Desert Fellow Rakesh Yadav
Desert fellow Rakesh
Gairo ko sawarne me khuch aise
Gairo ko sawarne me khuch aise
Sakshi Tripathi
हे पैमाना पुराना
हे पैमाना पुराना
Swami Ganganiya
*चार दिवस का है पड़ाव, फिर नूतन यात्रा जारी (वैराग्य गीत)*
*चार दिवस का है पड़ाव, फिर नूतन यात्रा जारी (वैराग्य गीत)*
Ravi Prakash
Loading...