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20 Feb 2024 · 1 min read

छिपी हो जिसमें सजग संवेदना।

राष्ट्रहित गह दिव्यता, दे चेतना।
छाॅंट दे जो सहज में जन -वेदना।
वही रचना देश का सम्मान है।
छिपी हो जिसमें सजग संवेदना।

पं बृजेश कुमार नायक

1 Like · 63 Views
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