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16 Nov 2022 · 1 min read

छल प्रपंच का जाल

हर तरफ पसरा हुआ है
अब छल प्रपंच का जाल
ऐसे में हर आदमी दिख
रहा मन से ही बदहाल
अविश्वास की रेखाएं घनी
हो रही इत उत चहुंओर
फिर कैसे समाज में बढ़ेेंगे
सुख और समृद्धि के ठौर
बस अपनी ही फिक्र में डूबे
शिखर पर आसीन सब लोग
ऐसे में कैसे सफल हो सकते
समाज में सामूहिकता के प्रयोग
हे ईश्वर देश के जन जन को
दो जन कल्याण की सुबुद्धि
ताकि देश में फिर प्रबल हो
अमन और भ्रातृत्व भाव समृद्ध

Language: Hindi
1 Like · 2 Comments · 242 Views
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