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3 Apr 2024 · 1 min read

चाँद बदन पर ग़म-ए-जुदाई लिखता है

चाँद बदन पर ग़म-ए-जुदाई लिखता है
दर्द मेरे सिरहाने बैठा रहता है
इश्क लपेटे सारी रात मैं रोई हूँ
रात का आँचल भींगा- भींगा लगता है

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