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18 Oct 2016 · 1 min read

चक्र सुदर्शन , विहग गरण जब फूले थे बल म्ं बाला ।

चक्र सुदर्शन , विहग गरुण जब फूले थे बलमें , बाला!
कृष्ण इंगितों पर लीलाकर अहम् हरा पलमें ,बाला !
रूप धरा हरि ने रघुवरका, बनी सत्यभामा , सीता ।
किये कंत के चरण- स्पर्श , तज भामा पद तुमने, बाला !

—— जितेंद्रकमलआनंद

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
176 Views
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