Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Jun 2023 · 1 min read

*घूॅंघट में द्विगुणित हुआ, नारी का मधु रूप (कुंडलिया)*

घूॅंघट में द्विगुणित हुआ, नारी का मधु रूप (कुंडलिया)
—————————————-
घूॅंघट में द्विगुणित हुआ, नारी का मधु रूप
जैसे छनकर आ रही, पेड़ों से हो धूप
पेड़ों से हो धूप, दुपहरी मद्धिम छाती
तनिक लाज-संकोच, शर्म के चित्र बनाती
कहते रवि कविराय, अधखुले होते ज्यों पट
झॉंक रहा सौंदर्य, अलौकिक होता घूॅंघट
—————————————-
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

454 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
"जाति"
Dr. Kishan tandon kranti
मुश्किल जब सताता संघर्ष बढ़ जाता है🌷🙏
मुश्किल जब सताता संघर्ष बढ़ जाता है🌷🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
समर्पण
समर्पण
Sanjay ' शून्य'
🧟☠️अमावस की रात☠️🧟
🧟☠️अमावस की रात☠️🧟
SPK Sachin Lodhi
जीवन दुखों से भरा है जीवन के सभी पक्षों में दुख के बीज सम्मि
जीवन दुखों से भरा है जीवन के सभी पक्षों में दुख के बीज सम्मि
Ms.Ankit Halke jha
रोमांटिक रिबेल शायर
रोमांटिक रिबेल शायर
Shekhar Chandra Mitra
असफल लोगो के पास भी थोड़ा बैठा करो
असफल लोगो के पास भी थोड़ा बैठा करो
पूर्वार्थ
टॉम एंड जेरी
टॉम एंड जेरी
Vedha Singh
भूरा और कालू
भूरा और कालू
Vishnu Prasad 'panchotiya'
जीवन सुंदर खेल है, प्रेम लिए तू खेल।
जीवन सुंदर खेल है, प्रेम लिए तू खेल।
आर.एस. 'प्रीतम'
बोलती आँखे....
बोलती आँखे....
Santosh Soni
2724.*पूर्णिका*
2724.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
💐 Prodigy Love-19💐
💐 Prodigy Love-19💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
छवि अति सुंदर
छवि अति सुंदर
Buddha Prakash
हिन्दी दोहा - दया
हिन्दी दोहा - दया
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
दुःख, दर्द, द्वन्द्व, अपमान, अश्रु
दुःख, दर्द, द्वन्द्व, अपमान, अश्रु
Shweta Soni
फिसल गए खिलौने
फिसल गए खिलौने
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
मैं भी तुम्हारी परवाह, अब क्यों करुँ
मैं भी तुम्हारी परवाह, अब क्यों करुँ
gurudeenverma198
आराम का हराम होना जरूरी है
आराम का हराम होना जरूरी है
हरवंश हृदय
Hallucination Of This Night
Hallucination Of This Night
Manisha Manjari
रंगों का कोई धर्म नहीं होता होली हमें यही सिखाती है ..
रंगों का कोई धर्म नहीं होता होली हमें यही सिखाती है ..
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
दिल ने दिल को पुकारा, दिल तुम्हारा हो गया
दिल ने दिल को पुकारा, दिल तुम्हारा हो गया
Ram Krishan Rastogi
सच ज़िंदगी और जीवन में अंतर हैं
सच ज़िंदगी और जीवन में अंतर हैं
Neeraj Agarwal
*दशरथ (कुंडलिया)*
*दशरथ (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
ओ परबत  के मूल निवासी
ओ परबत के मूल निवासी
AJAY AMITABH SUMAN
19-कुछ भूली बिसरी यादों की
19-कुछ भूली बिसरी यादों की
Ajay Kumar Vimal
*** कभी-कभी.....!!! ***
*** कभी-कभी.....!!! ***
VEDANTA PATEL
मित्रता क्या है?
मित्रता क्या है?
Vandna Thakur
नेताजी (कविता)
नेताजी (कविता)
Artist Sudhir Singh (सुधीरा)
शिव आदि पुरुष सृष्टि के,
शिव आदि पुरुष सृष्टि के,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Loading...