Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

गोरे मुखड़े पर काला चश्मा

गोरे मुखड़े पर काला चश्मा
क्या खूब फबता है,
जैसे तीन चांँद जैसा सुंदर मुखड़ा,
पहले से हो,
ऊपर से काला चश्मा,
चार चांँद लगाता है।
हम भोले-भाले-काले,
कभी खुद को
तो कभी बनाने वाले को
कोसते हैं,
काले चश्मे वाले को देख,
अपनी किस्मत पर रोते हैं।
पर कभी चश्मे के पीछे से जाकर देख,
वह गोरा मुखड़ा खुद को छोड़
पूरी दुनियां को काला देखता है,
कभी निरीह जानवर
तो कभी फुटपाथ पर सोए
गरीबों को रौंदता है,
कभी मादक द्रव्य, देह व्यापार में
पकड़ा जाता है।
ऐसे गोरे मुखड़े पर
काला चश्मा से अच्छा
हमारा कला मुखड़ा
पर दिल का सच्चा।

(मौलिक व स्वरचित)
श्री रमण
बेगूसराय (बिहार)

6 Likes · 2 Comments · 309 Views
You may also like:
“माटी ” तेरे रूप अनेक
DESH RAJ
परिकल्पना
संदीप सागर (चिराग)
सब खड़े सुब्ह ओ शाम हम तो नहीं
Anis Shah
एहसासात
Shyam Sundar Subramanian
नियमन
Shyam Sundar Subramanian
गंगा दशहरा
श्री रमण 'श्रीपद्'
तुम निष्ठुर भूल गये हम को, अब कौन विधा यह...
संजीव शुक्ल 'सचिन'
भूल कैसे हमें
Dr fauzia Naseem shad
मायके की धूप रे
Rashmi Sanjay
Love Heart
Buddha Prakash
प्यार
Satish Arya 6800
एक बात है
Varun Singh Gautam
"कारगिल विजय दिवस"
Lohit Tamta
सुना है।
Taj Mohammad
मंजिल की तलाश
AMRESH KUMAR VERMA
जब पिया घर नही आए
Ram Krishan Rastogi
मां के आंचल
Nitu Sah
✍️शराब का पागलपन✍️
'अशांत' शेखर
अग्निवीर
पाण्डेय चिदानन्द
" आशा की एक किरण "
DrLakshman Jha Parimal
खोकर के अपनो का विश्वास ।......(भाग- 2)
Buddha Prakash
द माउंट मैन: दशरथ मांझी
Jyoti Khari
ग्रह और शरीर
Vikas Sharma'Shivaaya'
#मोहब्बत मेरी
Seema 'Tu haina'
योग
DrKavi Nirmal
विश्व जनसंख्या दिवस
Ram Krishan Rastogi
आज़ादी का परचम
Rekha Drolia
बरसात
प्रकाश राम
#धरती-सावन
आर.एस. 'प्रीतम'
नाथूराम गोडसे
Anamika Singh
Loading...