Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 May 2023 · 1 min read

गोधरा

7. गोधरा

ये धरा गोधरा मत बनाओ ,
भूखे तन पर कफन मत उढ़ाओ ।
गंगा जमुना कि ये सरज़मी है ,
गौरी गज़नी यहाॅ मत बुलाओ ।
ये धरा गोधरा मत बनाओ ।

भाईचारा हो लक्ष्मण के जैसा ,
भेष मारीच का मत बनाओ ।
मिल रहें हैं यहाॅ दिल युगों से ,
इनमें दूरी न अब तुम बढ़ाओ ।
ये धरा गोधरा मत बनाओ ।

तीन नदियों का संगम यहाँ है ,
तीन धर्मों का संगम बनाओ ।
एकता है अभी भी दिलों में ,
पर इसे राहजनों से बचाओ ।
ये धरा गोधरा मत बनाओ ।

शीश सिंहों ने जिसपर लुटाये ,
गीदड़ों से उसे अब बचाओ ।
जो भरत सिंह शावक से खेले
उस भरत को धरा पर बुलाओ ।
ये धरा गोधरा मत बनाओ ।

एक दिल एक जॉ एक तन है ,
फिर न कपड़े अलग तुम सिलाओ ।
एक चूल्हे पे रोटी बनाकर ,
हम तुम्हे तुम हमें खुद खिलाओ ।
ये धरा गोधरा मत बनाओ ।

काशी मथुरा अयोध्या की छोड़ो ,
तान हिन्दोस्ताँ की सुनाओ ।
तुम ये सारा जहाँ हम से ले लो ,
बस दिलों को दिलों से मिलाओ ।
ये धरा गोधरा मत बनाओ ।
एकता हो अटल इस वतन की ,
राम बनके कलाम आज आओ ।
एक उंगली पे लेकर सुदर्शन ,
शान्ति की बात जग को बताओ ।
ये धरा गोधरा मत बनाओ ।

प्रकाश चंद्र , लखनऊ
IRPS (Retd)

Language: Hindi
492 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Prakash Chandra
View all
You may also like:
शून्य ही सत्य
शून्य ही सत्य
Kanchan verma
18)”योद्धा”
18)”योद्धा”
Sapna Arora
रमेशराज की पद जैसी शैली में तेवरियाँ
रमेशराज की पद जैसी शैली में तेवरियाँ
कवि रमेशराज
इश्क़-ए-क़िताब की ये बातें बहुत अज़ीज हैं,
इश्क़-ए-क़िताब की ये बातें बहुत अज़ीज हैं,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
"खुद को खुली एक किताब कर"
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
Environment
Environment
Neelam Sharma
3343.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3343.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
अब तुझे रोने न दूँगा।
अब तुझे रोने न दूँगा।
Anil Mishra Prahari
जीवनमंथन
जीवनमंथन
Shyam Sundar Subramanian
मैं भी साथ चला करता था
मैं भी साथ चला करता था
VINOD CHAUHAN
ढीठ बनने मे ही गुजारा संभव है।
ढीठ बनने मे ही गुजारा संभव है।
पूर्वार्थ
क्यों हिंदू राष्ट्र
क्यों हिंदू राष्ट्र
Sanjay ' शून्य'
जीवन की संगत में शामिल जब होती अभिलाषाओं की डोर
जीवन की संगत में शामिल जब होती अभिलाषाओं की डोर
©️ दामिनी नारायण सिंह
ओझल तारे हो रहे, अभी हो रही भोर।
ओझल तारे हो रहे, अभी हो रही भोर।
surenderpal vaidya
सर्दी के हैं ये कुछ महीने
सर्दी के हैं ये कुछ महीने
Atul "Krishn"
विपत्ति आपके कमजोर होने का इंतजार करती है।
विपत्ति आपके कमजोर होने का इंतजार करती है।
Paras Nath Jha
आम, नीम, पीपल, बरगद जैसे बड़े पेड़ काटकर..
आम, नीम, पीपल, बरगद जैसे बड़े पेड़ काटकर..
Ranjeet kumar patre
आपका दु:ख किसी की
आपका दु:ख किसी की
Aarti sirsat
मुस्किले, तकलीफे, परेशानियां कुछ और थी
मुस्किले, तकलीफे, परेशानियां कुछ और थी
Kumar lalit
*जी लो ये पल*
*जी लो ये पल*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बोये बीज बबूल आम कहाँ से होय🙏
बोये बीज बबूल आम कहाँ से होय🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
अटल बिहारी मालवीय जी (रवि प्रकाश की तीन कुंडलियाँ)
अटल बिहारी मालवीय जी (रवि प्रकाश की तीन कुंडलियाँ)
Ravi Prakash
हम अपनी आवारगी से डरते हैं
हम अपनी आवारगी से डरते हैं
Surinder blackpen
जीत का सेहरा
जीत का सेहरा
Dr fauzia Naseem shad
RATHOD SRAVAN WAS GREAT HONORED
RATHOD SRAVAN WAS GREAT HONORED
राठौड़ श्रावण लेखक, प्रध्यापक
हमने उनकी मुस्कुराहटों की खातिर
हमने उनकी मुस्कुराहटों की खातिर
Harminder Kaur
हर जौहरी को हीरे की तलाश होती है,, अज़ीम ओ शान शख्सियत.. गुल
हर जौहरी को हीरे की तलाश होती है,, अज़ीम ओ शान शख्सियत.. गुल
Shweta Soni
शहद टपकता है जिनके लहजे से
शहद टपकता है जिनके लहजे से
सिद्धार्थ गोरखपुरी
दिल के इस दर्द को तुझसे कैसे वया करु मैं खुदा ।
दिल के इस दर्द को तुझसे कैसे वया करु मैं खुदा ।
Phool gufran
#लानत_के_साथ...
#लानत_के_साथ...
*प्रणय प्रभात*
Loading...