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15 Feb 2023 · 1 min read

गेसू सारे आबनूसी,

गेसू सारे आबनूसी,
मूंगे जैसे ये अधर।
कमल की पंखुड़ियां आंखें,
सब फना हो जाएंगे।

बस सलामत नाम होगा,
होगा खालिक एक खुदा।
दरिया के पार लेकर जाए,
वह मुरशिद जो नाखुदा।

सतीश सृजन

1 Like · 386 Views
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