Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Mar 2017 · 1 min read

” गुलाल है ,धमाल है ,कहिये क्या -ख़याल है ” !!

रंगों की महफिल ,
डूबे डूबे से हैं !
सब अपने लगते ,
रंग अजूबे से हैं !
रंग उड़ाया ऐसा –
मची धमाल है !!

भारी है हुड़दंग ,
मस्ती यहाँ वहां !
अब परवाह किसे ,
कोई गुमाँ कहाँ !
खुशियां काँधे चढ़ी –
करे सवाल है !!

तुमको रंगना है ,
अब गहरे रंग से !
दूजा रंग चढ़े ना ,
प्रीत बढ़े ढंग से !
दुनिया बढ़ी अजूबी –
रोज़ बवाल है !!

Language: Hindi
Tag: गीत
648 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सारे  ज़माने  बीत  गये
सारे ज़माने बीत गये
shabina. Naaz
आंखें मूंदे हैं
आंखें मूंदे हैं
इंजी. संजय श्रीवास्तव
*घने मेघों से दिन को रात, करने आ गया सावन (मुक्तक)*
*घने मेघों से दिन को रात, करने आ गया सावन (मुक्तक)*
Ravi Prakash
மழையின் சத்தத்தில்
மழையின் சத்தத்தில்
Otteri Selvakumar
पितृ दिवस ( father's day)
पितृ दिवस ( father's day)
Suryakant Dwivedi
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
दोपहर जल रही है सड़कों पर
दोपहर जल रही है सड़कों पर
Shweta Soni
चाय और सिगरेट
चाय और सिगरेट
आकाश महेशपुरी
23/217. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/217. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
स्वार्थ
स्वार्थ
Neeraj Agarwal
बीज अंकुरित अवश्य होगा
बीज अंकुरित अवश्य होगा
VINOD CHAUHAN
पहाड़ चढ़ना भी उतना ही कठिन होता है जितना कि पहाड़ तोड़ना ठीक उस
पहाड़ चढ़ना भी उतना ही कठिन होता है जितना कि पहाड़ तोड़ना ठीक उस
Dr. Man Mohan Krishna
‘ चन्द्रशेखर आज़ाद ‘ अन्त तक आज़ाद रहे
‘ चन्द्रशेखर आज़ाद ‘ अन्त तक आज़ाद रहे
कवि रमेशराज
* भाव से भावित *
* भाव से भावित *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आज का युद्ध, ख़ुद के ही विरुद्ध है
आज का युद्ध, ख़ुद के ही विरुद्ध है
Sonam Puneet Dubey
चाय ही पी लेते हैं
चाय ही पी लेते हैं
Ghanshyam Poddar
मौन अधर होंगे
मौन अधर होंगे
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
हवन
हवन
दीपक नील पदम् { Deepak Kumar Srivastava "Neel Padam" }
साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि का परिचय।
साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि का परिचय।
Dr. Narendra Valmiki
#मूल_दोहा-
#मूल_दोहा-
*प्रणय प्रभात*
मुझे भी
मुझे भी "याद" रखना,, जब लिखो "तारीफ " वफ़ा की.
Ranjeet kumar patre
"धैर्य"
Dr. Kishan tandon kranti
एक शे'र
एक शे'र
रामश्याम हसीन
गैरों सी लगती है दुनिया
गैरों सी लगती है दुनिया
देवराज यादव
नमस्ते! रीति भारत की,
नमस्ते! रीति भारत की,
Neelam Sharma
विष बो रहे समाज में सरेआम
विष बो रहे समाज में सरेआम
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
दोहा त्रयी . . . .
दोहा त्रयी . . . .
sushil sarna
"एहसानों के बोझ में कुछ यूं दबी है ज़िंदगी
गुमनाम 'बाबा'
मैंने देखा है मेरी मां को रात भर रोते ।
मैंने देखा है मेरी मां को रात भर रोते ।
Phool gufran
जीनते भी होती है
जीनते भी होती है
SHAMA PARVEEN
Loading...