Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Mar 2023 · 1 min read

गुलाब-से नयन तुम्हारे

गुलाब-से नयन तुम्हारे
महके-महके हुए है।
हम चुम ले तुमको,
ये महक उठे मुहब्बत हमारी…

किताब-सा मन है मेरा
तुम उसमें गुलाब छुपा लो
अपने जीवन की महकती
मुहब्बत को तुम बसा लो…

~परमार प्रकाश

462 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
धिक्कार उन मूर्खों को,
धिक्कार उन मूर्खों को,
*प्रणय प्रभात*
संविधान को अपना नाम देने से ज्यादा महान तो उसको बनाने वाले थ
संविधान को अपना नाम देने से ज्यादा महान तो उसको बनाने वाले थ
SPK Sachin Lodhi
" रिन्द (शराबी) "
Dr. Kishan tandon kranti
खुद के अंदर ही दुनिया की सारी खुशियां छुपी हुई है।।
खुद के अंदर ही दुनिया की सारी खुशियां छुपी हुई है।।
पूर्वार्थ
घुली अजब सी भांग
घुली अजब सी भांग
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
सच तो रंग काला भी कुछ कहता हैं
सच तो रंग काला भी कुछ कहता हैं
Neeraj Agarwal
गाँधी जयंती
गाँधी जयंती
Surya Barman
विकास की जिस सीढ़ी पर
विकास की जिस सीढ़ी पर
Bhupendra Rawat
आँखों से रिसने लगे,
आँखों से रिसने लगे,
sushil sarna
पुरखों की याद🙏🙏
पुरखों की याद🙏🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
होलिका दहन कथा
होलिका दहन कथा
विजय कुमार अग्रवाल
शौक-ए-आदम
शौक-ए-आदम
AJAY AMITABH SUMAN
गंगा मैया
गंगा मैया
Kumud Srivastava
स्थाई- कहो सुनो और गुनों
स्थाई- कहो सुनो और गुनों
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
जख्म भी रूठ गया है अबतो
जख्म भी रूठ गया है अबतो
सिद्धार्थ गोरखपुरी
संतुलन
संतुलन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
“बोझिल मन ”
“बोझिल मन ”
DrLakshman Jha Parimal
*शब्दों मे उलझे लोग* ( अयोध्या ) 21 of 25
*शब्दों मे उलझे लोग* ( अयोध्या ) 21 of 25
Kshma Urmila
उदासियाँ  भरे स्याह, साये से घिर रही हूँ मैं
उदासियाँ भरे स्याह, साये से घिर रही हूँ मैं
_सुलेखा.
मर मिटे जो
मर मिटे जो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
तू गीत ग़ज़ल उन्वान प्रिय।
तू गीत ग़ज़ल उन्वान प्रिय।
Neelam Sharma
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बड़ा हीं खूबसूरत ज़िंदगी का फलसफ़ा रखिए
बड़ा हीं खूबसूरत ज़िंदगी का फलसफ़ा रखिए
Shweta Soni
पास तो आना- तो बहाना था
पास तो आना- तो बहाना था"
भरत कुमार सोलंकी
अगर आप रिश्ते
अगर आप रिश्ते
Dr fauzia Naseem shad
सास खोल देहली फाइल
सास खोल देहली फाइल
नूरफातिमा खातून नूरी
ना कर नज़रंदाज़ देखकर मेरी शख्सियत को, हिस्सा हूं उस वक्त का
ना कर नज़रंदाज़ देखकर मेरी शख्सियत को, हिस्सा हूं उस वक्त का
SUDESH KUMAR
खुली आंखें जब भी,
खुली आंखें जब भी,
Lokesh Singh
🇮🇳🇮🇳*
🇮🇳🇮🇳*"तिरंगा झंडा"* 🇮🇳🇮🇳
Shashi kala vyas
कोई ऐसा बोलता है की दिल में उतर जाता है
कोई ऐसा बोलता है की दिल में उतर जाता है
कवि दीपक बवेजा
Loading...