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7 Feb 2024 · 1 min read

गीत

गीत

पहले मिलन तो बाद में ,
परिणय जरूरी है !!

दिन हैं कहां अपने हुए ,
खामोश रातें हैं !
सपने नहीं रीते रहे ,
सौगात बातें हैं !
यह आज अपना हो न हो ,
रखना सबूरी है !!

चाहें सभी खुशियां खड़ी ,
हों द्वार अपने भी !
उपलब्धि पर नजरें टिकी ,
हैं स्वाद चखने भी !
संध्या खिली मनुहार ले ,
लगे सिंदूरी है !!

बोया वही काटें सभी ,
पर श्रम जरूरी है !
जो भी मिले स्वीकार्य है ,
चाहें न पूरी हैं !
जो भाव मन खिलते रहे ,
लगते कपूरी हैं !!

सेवा समर्पण चाहती ,
फिर रंग खिलते हैं !
पल में मिटे हैं दूरियां ,
मधु छंद सजते हैं !
बहके अगर है रूप तो ,
चढ़ी मगरूरी है !!

स्वरचित / रचियता :
बृज व्यास
शाजापुर ( मध्य प्रदेश )

Language: Hindi
2 Likes · 1 Comment · 86 Views
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