Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Dec 2017 · 1 min read

“गीतिका”

“गीतिका”

उठाकर चल दिये सपने, बड़े अरमान आँखों में
ठिठककर पग बढ़े आगे, डगर अंजान आँखों में
दिखी मूरत तुम्हारी तो, न मन विश्वास रख पाया
मिरे तो बोझिल हैं कंधे, कहाँ दिनमान आँखों में॥
खिली है चाँदनी पथ पर, उगी सूरत विराने नभ
डराकर बढ़ रही मंजिल, सड़क सुनसान आँखों में॥
करिश्मा हो गया कोई, महेर मुझ दीवाने पर
परी है आ गई उड़कर, नहीं गूमान आँखों में॥
उड़े जो आ रहे बादल, कहीं घिर जाए न मैना
फुदककर गा रही बुलबुल, जगी पहचान आँखों में॥
बड़े सुंदर तिरे नैना, नक्श नजरों का क्या कहना
कयामत ढ़ा रहीं पलकें, ललक विद्यमान आँखों में॥
मिलूँ कैसे तुझे गौतम, न उड़ना सीख पाया हूँ
न मेरे पास पर कोई, नया यजमान आँखों में॥
महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

1 Like · 273 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
रात भर नींद भी नहीं आई
रात भर नींद भी नहीं आई
Shweta Soni
तुम्हारी जय जय चौकीदार
तुम्हारी जय जय चौकीदार
Shyamsingh Lodhi Rajput (Tejpuriya)
सूर्यदेव
सूर्यदेव
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
दादी माॅ॑ बहुत याद आई
दादी माॅ॑ बहुत याद आई
VINOD CHAUHAN
"हँसी"
Dr. Kishan tandon kranti
World Books Day
World Books Day
Tushar Jagawat
यादें....!!!!!
यादें....!!!!!
Jyoti Khari
चलो कुछ नया करते हैं
चलो कुछ नया करते हैं
AMRESH KUMAR VERMA
ब्रांड. . . .
ब्रांड. . . .
sushil sarna
तलाश है।
तलाश है।
नेताम आर सी
शिव अराधना
शिव अराधना
नवीन जोशी 'नवल'
प्रहार-2
प्रहार-2
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
सुध जरा इनकी भी ले लो ?
सुध जरा इनकी भी ले लो ?
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
हमने माना
हमने माना
SHAMA PARVEEN
ऐसा तूफान उत्पन्न हुआ कि लो मैं फँस गई,
ऐसा तूफान उत्पन्न हुआ कि लो मैं फँस गई,
Sukoon
बालि हनुमान मलयुद्ध
बालि हनुमान मलयुद्ध
Anil chobisa
रोगी जिसका तन हुआ, समझो तन बेकार (कुंडलिया)
रोगी जिसका तन हुआ, समझो तन बेकार (कुंडलिया)
Ravi Prakash
दोहा
दोहा
गुमनाम 'बाबा'
भारत का सिपाही
भारत का सिपाही
आनन्द मिश्र
वर्तमान परिस्थिति - एक चिंतन
वर्तमान परिस्थिति - एक चिंतन
Shyam Sundar Subramanian
#नवगीत-
#नवगीत-
*प्रणय प्रभात*
खुद को सही और
खुद को सही और
shabina. Naaz
जीवन अप्रत्याशित
जीवन अप्रत्याशित
पूर्वार्थ
बुझे अलाव की
बुझे अलाव की
Atul "Krishn"
दोस्तों की महफिल में वो इस कदर खो गए ,
दोस्तों की महफिल में वो इस कदर खो गए ,
Yogendra Chaturwedi
वो गुलमोहर जो कभी, ख्वाहिशों में गिरा करती थी।
वो गुलमोहर जो कभी, ख्वाहिशों में गिरा करती थी।
Manisha Manjari
सच तो रंग काला भी कुछ कहता हैं
सच तो रंग काला भी कुछ कहता हैं
Neeraj Agarwal
शुक्र मनाओ आप
शुक्र मनाओ आप
शेखर सिंह
ख़ुद से हमको
ख़ुद से हमको
Dr fauzia Naseem shad
राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस...
राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस...
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...