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2 Feb 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

गर बड़े हो जाओ तो तुम ख़ुद को अक्सर देखना
झाँकते रहना बराबर दिल के अंदर देखना

ज़िन्दगी से सारी ख़ुशियाँ कैसे होतीं लापता
दिल किसी इक महज़बीं से तुम लगा कर देखना

ये बुलंदी किस तरह हासिल हुई उसको यहाँ
है लिखी सारी कहानी आबलों पर देखना

ज़िन्दगी के इस सफ़र में मिलते हैं लाखों मगर
कौन है रहजन यहाँ पर कौन रहबर देखना

दिल के हुजरे में हमेशा ध्यान से रखना इसे
दिल बड़ा नाज़ुक है मेरा बन्दा परवर देखना

हरिजनों की बस्तियों में नूर है या तीरगी
पाँच सालों में कभी इक बार जाकर देखना

ऐब ग़ैरों के गिनाते फिरते हो प्रीतम अगर
अपनी कमियाँ आइने में तुम नज़र भर देखना

प्रीतम श्रावस्तवी

Language: Hindi
56 Views
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