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23 Dec 2022 · 1 min read

ग़ज़ल

फिक्र क्यों कुछ जो बेहिसाब नज़र आतें हैं
ज़िन्दगी भर के वो जबाब नज़र आतें हैं

चला हूँ दूर तलक उम्र गवाह है इसका
खुशी में फिर क्यों इंकलाब नजर आतें हैं

सकूँन की हरेक रात ख़्वाब लाये हंसी
हजारों फिर क्यों आफताब नजर आतें हैं

अगर वेफिक्र हैं वो मंजिलों के वास्ते तो
शिकन में फिर क्यों वो जनाब नजर आतें हैं

नज़रिया देखने का जिसका बुरा होता है
सभी इंसां उसे ख़राब नजर आतें हैं

जिन्हें एहसास ख़ूबसूरती की होती “महज़”
उनको काँटों में भी गुलाब नजर आतें हैं

Language: Hindi
2 Likes · 152 Views
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