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23 Jun 2016 · 1 min read

ग़ज़ल :– ले चल मुझे मैं जहाँ चाहता हूँ !!

ग़ज़ल :– ले चल मुझे मैं जहाँ चाहता हूँ !!

हसीं भोर रंगी समा चाहता हूँ !
ले चल मुझे मैं जहाँ चाहता हूँ !!

ज़रा देर कर दि सँवरने में मैंने !
इसके लिये अब क्षमा चाहता हूँ !!

मज़हब के दंगों से रोया बहुत मैं !
मौसम ज़रा खुशनुमा चाहता हूँ !!

मेरा देश असहाय बूढ़ा हुआ अब !
मैं आज होना जवां चाहता हूँ !!

अब तो फलक जैसी रोशन जमीं हो !
चमकते सितारे यहाँ चाहता हूँ !!

तेरे मनचले जिगर का मुझे क्या ?
मैं बस तेरी आत्मा चाहता हूँ !!

यहाँ डस रहा जो हमारी तपन को !
अँधेरों का अब खात्मा चाहता हूँ !!

अनुज तिवारी “इन्दवार”

2 Likes · 5 Comments · 961 Views
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