Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Jun 2023 · 1 min read

गले लोकतंत्र के नंगे / मुसाफ़िर बैठा

राजनीति में पार्टी
एक समुच्चय है आदमी का
लोकतंत्र के नाम पर
निहित स्वार्थों में अटता बंटता हित समूह

विकसनशील समाज की, कानों से देखने वाले और आंखों से सुनने वाले समाज की
मूल कमजोर नस पकड़
उसके अनुरूप एक पार्टी
अपने जन्म से लेकर आज तक
नंगा होकर चल रही है,
चल रही है बेशर्म होकर नंगा
बाकी पार्टियां
उसकी नंगई तले तबाह हैं!

आदमी समुच्चय में भी
आजन्म नंगा रह जाए
उसके असभ्य होने से अधिक यह
लोकतंत्र के पड़ने और
लोकतंत्र से गले होने की निशानी है!

Language: Hindi
359 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr MusafiR BaithA
View all
You may also like:
घर की गृहलक्ष्मी जो गृहणी होती है,
घर की गृहलक्ष्मी जो गृहणी होती है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
"हर बाप ऐसा ही होता है" -कविता रचना
Dr Mukesh 'Aseemit'
3289.*पूर्णिका*
3289.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
हथेली पर जो
हथेली पर जो
लक्ष्मी सिंह
लड़की किसी को काबिल बना गई तो किसी को कालिख लगा गई।
लड़की किसी को काबिल बना गई तो किसी को कालिख लगा गई।
Rj Anand Prajapati
पिता
पिता
Swami Ganganiya
दोहे
दोहे
अशोक कुमार ढोरिया
जय जय जगदम्बे
जय जय जगदम्बे
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
पूर्ण-अपूर्ण
पूर्ण-अपूर्ण
Srishty Bansal
इश्क़  जब  हो  खुदा  से  फिर  कहां  होश  रहता ,
इश्क़ जब हो खुदा से फिर कहां होश रहता ,
Neelofar Khan
आरक्षण बनाम आरक्षण / MUSAFIR BAITHA
आरक्षण बनाम आरक्षण / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
याद अमानत बन गयी, लफ्ज़  हुए  लाचार ।
याद अमानत बन गयी, लफ्ज़ हुए लाचार ।
sushil sarna
मैदान-ए-जंग में तेज तलवार है मुसलमान,
मैदान-ए-जंग में तेज तलवार है मुसलमान,
Sahil Ahmad
वोट का लालच
वोट का लालच
Raju Gajbhiye
मानवीय संवेदना बनी रहे
मानवीय संवेदना बनी रहे
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
दिल शीशे सा
दिल शीशे सा
Neeraj Agarwal
हमारे प्यारे दादा दादी
हमारे प्यारे दादा दादी
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
नव-निवेदन
नव-निवेदन
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
हँसते - रोते कट गए , जीवन के सौ साल(कुंडलिया)
हँसते - रोते कट गए , जीवन के सौ साल(कुंडलिया)
Ravi Prakash
सच्चाई है कि ऐसे भी मंज़र मिले मुझे
सच्चाई है कि ऐसे भी मंज़र मिले मुझे
अंसार एटवी
झूठा प्यार।
झूठा प्यार।
Sonit Parjapati
जैसे आँखों को
जैसे आँखों को
Shweta Soni
शब्द भावों को सहेजें शारदे माँ ज्ञान दो।
शब्द भावों को सहेजें शारदे माँ ज्ञान दो।
Neelam Sharma
ये दुनिया सीधी-सादी है , पर तू मत टेढ़ा टेढ़ा चल।
ये दुनिया सीधी-सादी है , पर तू मत टेढ़ा टेढ़ा चल।
सत्य कुमार प्रेमी
ग़ज़ल
ग़ज़ल
rekha mohan
जबरदस्त विचार~
जबरदस्त विचार~
दिनेश एल० "जैहिंद"
■ कुत्ते की टेढ़ी पूंछ को सीधा  करने की कोशिश मात्र समय व श्र
■ कुत्ते की टेढ़ी पूंछ को सीधा करने की कोशिश मात्र समय व श्र
*प्रणय प्रभात*
मेरी कलम से…
मेरी कलम से…
Anand Kumar
चॅंद्रयान
चॅंद्रयान
Paras Nath Jha
Loading...