Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Aug 2, 2016 · 1 min read

गर दे एक ही वजह तू मुस्कराने की

गर दे इक ही वजह तू मुस्कराने की
वार दूँ मै तुझपे हर ख़ुशी जमाने की
**************************
लिख दूं मै हर इक साँस पे नाम तेरा
गर रख ले दिल में जगह तू दीवाने की
****************************
कपिल कुमार
01/08/2016

294 Views
You may also like:
बरसात की छतरी
Buddha Prakash
अधूरी बातें
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
ये दिल मेरा था, अब उनका हो गया
Ram Krishan Rastogi
" मां" बच्चों की भाग्य विधाता
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
बदल जायेगा
शेख़ जाफ़र खान
पिता जी का आशीर्वाद है !
Kuldeep mishra (KD)
पितृ स्तुति
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
✍️गुरु ✍️
Vaishnavi Gupta
पिता
Santoshi devi
"फिर से चिपको"
पंकज कुमार कर्ण
खुद को तुम पहचानों नारी ( भाग १)
Anamika Singh
आओ तुम
sangeeta beniwal
✍️कश्मकश भरी ज़िंदगी ✍️
Vaishnavi Gupta
घनाक्षरी छन्द
शेख़ जाफ़र खान
स्वर कटुक हैं / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
✍️बड़ी ज़िम्मेदारी है ✍️
Vaishnavi Gupta
मेरे पिता है प्यारे पिता
Vishnu Prasad 'panchotiya'
पिता हिमालय है
जगदीश शर्मा सहज
आज मस्ती से जीने दो
Anamika Singh
माँ की याद
Meenakshi Nagar
उस पथ पर ले चलो।
Buddha Prakash
✍️अकेले रह गये ✍️
Vaishnavi Gupta
बेरूखी
Anamika Singh
मेरी अभिलाषा
Anamika Singh
मातृ रूप
श्री रमण 'श्रीपद्'
आई राखी
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
तुम वही ख़्वाब मेरी आंखों का
Dr fauzia Naseem shad
पिता
Kanchan Khanna
पिता
Dr. Kishan Karigar
कभी वक़्त ने गुमराह किया,
Vaishnavi Gupta
Loading...