Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Aug 2023 · 1 min read

*खो दिया सुख चैन तेरी चाह मे*

खो दिया सुख चैन तेरी चाह मे
**************************

थक गये हम राही तेरे राह में,
खो दिया सुख चैन तेरी चाह में।

भूलकर भी हम भूल सकते नहीं,
बखश दो हमें दो कदम पनाह में।
,
मुश्किल बहुत रहना उनके बिना,
कर दो रहम रख लो हमें छाँह में।

शेष रह गई लड़ाई आर-पार की,
देख लो न्है दर्द कितना आह में।

आ गई वो घड़ी कह दूँ मनसीरत,
बाँध लो दायरे में अपनी बाँह में।
**************************
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेडी राओ वाली (कैथल)

1 Like · 352 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
#दोहा-
#दोहा-
*Author प्रणय प्रभात*
"तुम इंसान हो"
Dr. Kishan tandon kranti
बारिश की संध्या
बारिश की संध्या
महेश चन्द्र त्रिपाठी
नारदीं भी हैं
नारदीं भी हैं
सिद्धार्थ गोरखपुरी
“बेवफा तेरी दिल्लगी की दवा नही मिलती”
“बेवफा तेरी दिल्लगी की दवा नही मिलती”
Basant Bhagawan Roy
मां जैसा ज्ञान देते
मां जैसा ज्ञान देते
Harminder Kaur
दो अक्षर का शब्द है , सबसे सुंदर प्रीत (कुंडलिया)
दो अक्षर का शब्द है , सबसे सुंदर प्रीत (कुंडलिया)
Ravi Prakash
मिष्ठी के लिए सलाद
मिष्ठी के लिए सलाद
Manu Vashistha
तोता और इंसान
तोता और इंसान
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
आओ ऐसा एक भारत बनाएं
आओ ऐसा एक भारत बनाएं
नेताम आर सी
अंधेरे के आने का खौफ,
अंधेरे के आने का खौफ,
Buddha Prakash
हमारा चंद्रयान थ्री
हमारा चंद्रयान थ्री
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
*मां तुम्हारे चरणों में जन्नत है*
*मां तुम्हारे चरणों में जन्नत है*
Krishna Manshi
بدل گیا انسان
بدل گیا انسان
Ahtesham Ahmad
जालिमों तुम खोप्ते रहो सीने में खंजर
जालिमों तुम खोप्ते रहो सीने में खंजर
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
“गुप्त रत्न”नहीं मिटेगी मृगतृष्णा कस्तूरी मन के अन्दर है,
“गुप्त रत्न”नहीं मिटेगी मृगतृष्णा कस्तूरी मन के अन्दर है,
गुप्तरत्न
निर्मल निर्मला
निर्मल निर्मला
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
उम्मीद
उम्मीद
Dr fauzia Naseem shad
दर्द को मायूस करना चाहता हूँ
दर्द को मायूस करना चाहता हूँ
Sanjay Narayan
ज्ञान-दीपक
ज्ञान-दीपक
Pt. Brajesh Kumar Nayak
वो मेरी कविता
वो मेरी कविता
Dr.Priya Soni Khare
"मेरे नाम की जय-जयकार करने से अच्‍छा है,
शेखर सिंह
कृषक
कृषक
Shaily
प्रकृति - विकास (कविता) 11.06 .19 kaweeshwar
प्रकृति - विकास (कविता) 11.06 .19 kaweeshwar
jayanth kaweeshwar
गवाह तिरंगा बोल रहा आसमान 🇮🇳
गवाह तिरंगा बोल रहा आसमान 🇮🇳
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
आंख में बेबस आंसू
आंख में बेबस आंसू
Dr. Rajeev Jain
बेख़ौफ़ क़लम
बेख़ौफ़ क़लम
Shekhar Chandra Mitra
सो रहा हूं
सो रहा हूं
Dr. Meenakshi Sharma
किस दौड़ का हिस्सा बनाना चाहते हो।
किस दौड़ का हिस्सा बनाना चाहते हो।
Sanjay ' शून्य'
!! निरीह !!
!! निरीह !!
Chunnu Lal Gupta
Loading...