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खाली पैमाना

दिल खाली पैमाना सा रह जाता है ,
कोई जाम उल्फत का नहीं आता है ।

क्या रकीब या रफीक सब एक जैसे ,
हां! कुछ नुक्तचिनियां जरूर डालता है ।

कुछ अरमान है सूखे फूलों जैसे बेजान ,
जिनके आंसुओं से ही यह जाम भरता है ।

तकदीर से तो कोई उम्मीद न रही हमें अब ,
मगर खुदा से जरूर गिला सा रह जाता है ।

आखिरश ख्वाब भी टूट गए पैमाने जैसे,
मगर हर टुकड़े में एक अक्स नजर आता है ।

दिल के पैमाने को भरते है बस इंतजार से,
देखें कब कोई फरिश्ता मेहरबान होता है ।

“अनु,” को अब जाकर समझ में आया ,
जिंदगी जीने मे औ उसे गुजारने में फर्क होता है ।

5 Likes · 3 Comments · 123 Views
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