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14 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-122💐

खंज़र बचे हों और उन्हें भी आज़मालो,
तहफ़्फ़ुज़^ हो तुम ही,दिल में जो बसे।।

^तहफ़्फ़ुज़-सुरक्षा, चाक चौबन्द, पैरवी

©®अभिषेक पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
161 Views
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