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9 Jul 2021 · 1 min read

क्षणिकाएं

दर्द

दर्द ने कलेजा भर दिया
तुम मरहम लेकर बैठे
मरहम भी लगा घाव पर
पर तासीर वही रही

जिन्दगी

जिंदगी रेत सी फिसली
पकडंना चाह , हाथ न लगी
पर जो खुद छोड़ चली
तब सबने पकड़ना चाहा

राजनीति

खेल कलन्दर सी है राजनीति
कभी इस तो कभी उस दल
जब बजती डुगडुगी चुनाव की
तब दिखती सही उछलकूद

Language: Hindi
77 Likes · 488 Views
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