कौन हूँ मैं

कौन हूँ मैं

लाडली बेटी के रूप में मेरी माँ ने जनी।
मैं किसी की बहन तो किसी की पोती बनी।

समय के साथ साथ मैं बढ़ती गयी।
पाबंदियां मुझ पर लगती गयी।

अपने मन की बातें मन में ही छिपा लेती।
रोक कर आंसू अपने मैं मंद मंद मुस्कुरा देती।

जवान हुई तो घर वालों ने कर दी शादी।
वो भी छीन गयी जो मिली हुई थी आजादी।

ससुराल में सब से दब कर रहना पड़ता।
छोटी छोटी बातों पर हर कोई मुझसे लड़ता।

समय का पहिया यूँ ही चलता रहा।
हर रिश्ता मुझे यूँ ही छलता रहा।

रिश्तों की डोर से बंधी आज तक मौन हूँ मैं।
पर मन में एक सवाल उठता है कौन हूँ मैं।

क्या मेरा वजूद है, क्या मेरी हस्ती है।
दुनिया क्यों मुझ पर ही तंज कसती है।

जब भी अपना वजूद तलाशना चाहा।
दुनिया ने पैरों तले मुझे कुचलना चाहा।

आखिर कब तक अपने वजूद से महरूम रहूंगी मैं।
अब तो हकीकत ऐ फ़साना खुल कर कहूँगी मैं।

“”सुलक्षणा”” भी अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है।
दिन प्रति दिन सफलता की एक एक सीढ़ी चढ़ रही है।

1 Like · 183 Views
You may also like:
ये कैसा बेटी बाप का रिश्ता है?
Taj Mohammad
पिता के चरणों को नमन ।
Buddha Prakash
Little baby !
Buddha Prakash
दहेज़
आकाश महेशपुरी
आज तिलिस्म टूट गया....
Saraswati Bajpai
सुबह आंख लग गई
Ashwani Kumar Jaiswal
# जज्बे सलाम ...
Chinta netam मन
पिता के होते कितने ही रूप।
Taj Mohammad
ये शिक्षामित्र है भाई कि इसमें जान थोड़ी है
आकाश महेशपुरी
'तुम भी ना'
Rashmi Sanjay
💐मौज़💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आ जाओ राम।
Anamika Singh
हायकु
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
रिश्तों की कसौटी
VINOD KUMAR CHAUHAN
पिता कुछ भी कर जाता है।
Taj Mohammad
ऊँच-नीच के कपाट ।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
पितृ स्तुति
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
"एक यार था मेरा"
Lohit Tamta
मेरे पापा
ओनिका सेतिया 'अनु '
खाली मन से लिखी गई कविता क्या होगी
Sadanand Kumar
एकाकीपन
Rekha Drolia
"साहिल"
Dr. Alpa H.
पिता का कंधा याद आता है।
Taj Mohammad
मैं उनको शीश झुकाता हूँ
Dheerendra Panchal
प्रेम
Vikas Sharma'Shivaaya'
दिल से निकले हुए कुछ मुक्तक
Ram Krishan Rastogi
चलो गांवो की ओर
Ram Krishan Rastogi
पिता की सीख
Anamika Singh
तुम्हीं हो पापा
Krishan Singh
मत ज़हर हबा में घोल रे
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Loading...