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23 Jun 2023 · 1 min read

कुछ यूं मेरा इस दुनिया में,

कुछ यूं मेरा इस दुनिया में,
कालिदास सा रसूख रहा।
कि जलता रहा मेरा घर,भयंकर लपटों में,
और मैं धुंए से महल बनाने में मसरूफ रहा।

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