Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jan 2017 · 1 min read

कुछ नये दोहे

1–
धन को काला कह रहे, देखो अपना रूप,
लाइन वो भी लग रहे, कल तक जो थे भूप।।

2–
तुलना अब न कीजिए, ये है जहर समान।

कैसा आया वक्त है, नमक हुआ हराम।।

3–
सेना कभी न कर सके, दो पल भी आराम।
लाइन जो लगनी पड़ी, कोसे लोग तमाम।।

4–
बटुआ था प्यार का, खाली ही रह गया।।
भरते रहे प्यार को, पाप घडा भर गया।।

5–
पी बिना जी ना लगे, पी बिना ना चैन।।
सदियों लम्बी लग रही, छोटी थी जो रैन।।

6–
बात नोट की कीजिए, न कीजै कुछ काम।।

पैसे की माला जपै, छोड़ राम का नाम।।

7–
विषमय नीर हो गया, हुए विषैले वन।

प्यार है लालच बना, विषधर बैठे मन।।

8–
आंगन सूना हो गया, सूना हर इतवार।

पिया के घर बस गयी, छोड मेरा संसार।।

स्वरचित।

अमित मौर्य

+91-7849894373

Language: Hindi
1 Like · 738 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
!! जानें कितने !!
!! जानें कितने !!
Chunnu Lal Gupta
लेंस प्रत्योपण भी सिर्फ़
लेंस प्रत्योपण भी सिर्फ़
*प्रणय प्रभात*
जो तू नहीं है
जो तू नहीं है
हिमांशु Kulshrestha
हमको तेरा ख़्याल
हमको तेरा ख़्याल
Dr fauzia Naseem shad
23/119.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/119.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बुंदेली चौकड़िया
बुंदेली चौकड़िया
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
माफिया
माफिया
Sanjay ' शून्य'
स्त्री
स्त्री
Dinesh Kumar Gangwar
"प्रार्थना"
Dr. Kishan tandon kranti
कुदरत
कुदरत
Neeraj Agarwal
समंदर में नदी की तरह ये मिलने नहीं जाता
समंदर में नदी की तरह ये मिलने नहीं जाता
Johnny Ahmed 'क़ैस'
*ग़ज़ल*
*ग़ज़ल*
शेख रहमत अली "बस्तवी"
//खलती तेरी जुदाई//
//खलती तेरी जुदाई//
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
কেণো তুমি অবহেলনা করো
কেণো তুমি অবহেলনা করো
DrLakshman Jha Parimal
ओझल तारे हो रहे, अभी हो रही भोर।
ओझल तारे हो रहे, अभी हो रही भोर।
surenderpal vaidya
***
*** " मन मेरा क्यों उदास है....? " ***
VEDANTA PATEL
इंसान क्यों ऐसे इतना जहरीला हो गया है
इंसान क्यों ऐसे इतना जहरीला हो गया है
gurudeenverma198
ना कुछ जवाब देती हो,
ना कुछ जवाब देती हो,
Dr. Man Mohan Krishna
*अकड़ू-बकड़ू थे दो डाकू (बाल कविता )*
*अकड़ू-बकड़ू थे दो डाकू (बाल कविता )*
Ravi Prakash
24--- 🌸 कोहरे में चाँद 🌸
24--- 🌸 कोहरे में चाँद 🌸
Mahima shukla
अज्ञानी की कलम
अज्ञानी की कलम
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
(कहानी)
(कहानी) "सेवाराम" लेखक -लालबहादुर चौरसिया लाल
लालबहादुर चौरसिया लाल
गुज़ारिश है रब से,
गुज़ारिश है रब से,
Sunil Maheshwari
हम सा भी कोई मिल जाए सरेराह चलते,
हम सा भी कोई मिल जाए सरेराह चलते,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
"फूलों की तरह जीना है"
पंकज कुमार कर्ण
'Here's the tale of Aadhik maas..' (A gold winning poem)
'Here's the tale of Aadhik maas..' (A gold winning poem)
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
वह फूल हूँ
वह फूल हूँ
Pt. Brajesh Kumar Nayak
"चलो जी लें आज"
Radha Iyer Rads/राधा अय्यर 'कस्तूरी'
मै ज़िन्दगी के उस दौर से गुज़र रहा हूँ जहाँ मेरे हालात और मै
मै ज़िन्दगी के उस दौर से गुज़र रहा हूँ जहाँ मेरे हालात और मै
पूर्वार्थ
छत्तीसगढ़ी हाइकु
छत्तीसगढ़ी हाइकु
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Loading...