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10 Jul 2023 · 1 min read

कितना रोका था ख़ुद को

कितना रोका था ख़ुद को
फ़िर भी डूब गये
तेरी आँखों की गहराई में..
दीवानों से फिरते हैं
महफ़िल यारी सब छूट गईं
ढूंढा करते हैं,
ख़ुद को तनहाई में..!!!!

हिमांशु Kulshreshtha

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