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Sep 5, 2016 · 1 min read

कविता :– संघर्ष

कविता :– संघर्ष !!

संघर्ष करो ! संघर्ष करो !
संघर्ष करो ! संघर्ष करो !!

संघर्ष हो जीने का मक़सद ,
संघर्ष बिना क्या जीना है !
पर जो संघर्ष ना कर सके ,
जीने से बेहतर मरना है !
“संघर्ष”शब्द में “हर्ष” छिपा ,
जो खुशहाली लाता है !
संघर्ष ना करने वालों का
मस्तक नीचा हो जाता है !!
आकर के इन राहों में
जीवन में उत्कर्ष भरो !

संघर्ष करो ! संघर्ष करो !
संघर्ष करो ! संघर्ष करो !!

अनुज तिवारी “इन्दवार”

1 Like · 4 Comments · 1078 Views
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