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Jun 10, 2016 · 1 min read

” कलम की कोर से काजल , लगाता हूँ मैं कविता को “

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कलम की कोर से काजल , लगाता हूँ मैं कविता को ।
दिखा कर आइना दिल का , सजाता हूँ मैं कविता को ।
बहुत श्रद्धा सहित शब्दों , कि माला में पिरोकर के ,
नमन कर शारदे माँ को , सुनाता हूँ मैं कविता को ।
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वीर पटेल

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