Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Jan 2024 · 1 min read

कर्म-बीज

,
कर्म-बीज

जिजीविषा एक मनोभाव है,
जो कि मन: की मनोभूमि है!
कर्म-बीज जब रोपित होता-
चक्षु हृदय के खुल जाते हैं !!
———————————–

आँख के अंधे सब-कुछ कर लें,
जीवन का हर इक रंग भर लें !
हिय अंधे कुछ ना— कर पाएँ –
किंकर्तव्य दशा ——– पाते हैं !!

कर्म बीज जब रोपित होता –
चक्षु हृदय के खुल जाते हैं !
—‌——————————–

ग्रह-नक्षत्र सब ही गति-मय हैं ,
देहज, अंडज भी रति-मय हैं ;
जिन के शोणित ही गतिमय हैं-
वह ही जीवन जी —- पाते हैं !

कर्म बीज जब रोपित होता-
चक्षु हृदय के खुल जाते हैं !
———————————-

त्वरित लाभ भी हो सकता है,
त्वरित हानि भी हो जाती है ;
लेकिन जीवन पल-पल बीते –
समझौते’ —- मुँहकी खाते हैं !

कर्म बीज जब रोपित होता-
चक्षु हृदय के खुल जाते हैं !
———————————-

एक एक ज्यों संख्या बढ़ती ,
एक-एक ज्यों संख्या घटती ;
एक -एक स्वांसा की कीमत-
फेर-बदल ना कर — पाते हैं !

कर्म बीज जब रोपित होता-
चक्षु हृदय के खुल जाते हैं !
————————————

जिन की जिजीविषा जिंदा है ,
सच में वह —-मानव जिंदा है ;
आँख मूँद जो —–देख न पाये-
अंधे वही ——– कहे जाते हैं !

कर्म बीज जब रोपित होता-
चक्षु हृदय के खुल जाते हैं !
————————————-

आँख खोल कर सब ने देखा,
आँखों से तो सब को दिखता ;
आँख मूँद भी देख सकें जो —
वो सर्वज्ञ——–कहे जाते हैं !

कर्म बीज जब रोपित होता –
चक्षु हृदय के खुल जाते हैं !
————————————
मौलिक चिंतन
स्वरूप दिनकर /आगरा
21-01-2024
————————-‐———–

96 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ramswaroop Dinkar
View all
You may also like:
सुबह की नमस्ते
सुबह की नमस्ते
Neeraj Agarwal
सर्दी
सर्दी
Dhriti Mishra
नव्य द्वीप का रहने वाला
नव्य द्वीप का रहने वाला
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
गंगा मैया
गंगा मैया
Kumud Srivastava
* भोर समय की *
* भोर समय की *
surenderpal vaidya
न ही मगरूर हूं, न ही मजबूर हूं।
न ही मगरूर हूं, न ही मजबूर हूं।
विकास शुक्ल
कबीरा यह मूर्दों का गांव
कबीरा यह मूर्दों का गांव
Shekhar Chandra Mitra
है धरा पर पाप का हर अभिश्राप बाकी!
है धरा पर पाप का हर अभिश्राप बाकी!
Bodhisatva kastooriya
सजदे में झुकते तो हैं सर आज भी, पर मन्नतें मांगीं नहीं जातीं।
सजदे में झुकते तो हैं सर आज भी, पर मन्नतें मांगीं नहीं जातीं।
Manisha Manjari
पात कब तक झरेंगें
पात कब तक झरेंगें
Shweta Soni
उनको मेरा नमन है जो सरहद पर खड़े हैं।
उनको मेरा नमन है जो सरहद पर खड़े हैं।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
बात सीधी थी
बात सीधी थी
Dheerja Sharma
प्राण दंडक छंद
प्राण दंडक छंद
Sushila joshi
तू प्रतीक है समृद्धि की
तू प्रतीक है समृद्धि की
gurudeenverma198
मैं खुश हूँ! गौरवान्वित हूँ कि मुझे सच्चाई,अच्छाई और प्रकृति
मैं खुश हूँ! गौरवान्वित हूँ कि मुझे सच्चाई,अच्छाई और प्रकृति
विमला महरिया मौज
बुंदेली लघुकथा - कछु तुम समजे, कछु हम
बुंदेली लघुकथा - कछु तुम समजे, कछु हम
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
‘ विरोधरस ‘---7. || विरोधरस के अनुभाव || +रमेशराज
‘ विरोधरस ‘---7. || विरोधरस के अनुभाव || +रमेशराज
कवि रमेशराज
कोई नयनों का शिकार उसके
कोई नयनों का शिकार उसके
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
विषय – मौन
विषय – मौन
DR ARUN KUMAR SHASTRI
*जाते देखो भक्तजन, तीर्थ अयोध्या धाम (कुंडलिया)*
*जाते देखो भक्तजन, तीर्थ अयोध्या धाम (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
दो शे'र - चार मिसरे
दो शे'र - चार मिसरे
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
"अन्दर ही अन्दर"
Dr. Kishan tandon kranti
2496.पूर्णिका
2496.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कब तक जीने के लिए कसमे खायें
कब तक जीने के लिए कसमे खायें
पूर्वार्थ
#महसूस_करें...
#महसूस_करें...
*Author प्रणय प्रभात*
निजी विद्यालयों का हाल
निजी विद्यालयों का हाल
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
बाल कविता: मोटर कार
बाल कविता: मोटर कार
Rajesh Kumar Arjun
निर्मम क्यों ऐसे ठुकराया....
निर्मम क्यों ऐसे ठुकराया....
डॉ.सीमा अग्रवाल
दोस्ती की कीमत - कहानी
दोस्ती की कीमत - कहानी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
खोज करो तुम मन के अंदर
खोज करो तुम मन के अंदर
Buddha Prakash
Loading...