Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
2 Dec 2022 · 1 min read

“ऐनक मित्र”

“ऐनक मित्र”
पहले तो थी मैं साथी मात्र बुढ़ापे की
सबकी नाक पर चढ़के बैठ जाती थी
आवश्यकता महसूस होती बुढ़ापे में मेरी
ऐनक नाम से मैं तब पहचानी जाती थी,
जैसे जैसे उम्र बढ़ती, बढ़ती मेरी जरूरत
यही सब सोच सोचकर मैं इतरा जाती थी
डॉक्टर के पास जाते दादा आंख बनवाने
काले रंग की चश्मा तब पहनाई जाती थी,
तब तक बिठाए रखते थे मुझे आंखों पर
जब तक आंखे सही नहीं हो जाती थी
सही होते ही मुझे अजीब सा डर सताता
फेंके जाने के भय से मैं घबरा जाती थी,
मेरा अस्तित्व भी कचरे में बह गया तब
जब से आंख में दवाई डलनी बंद हुई थी
बच्चों का खिलौना बन कर रह गई मैं तो
ऐनक मित्र के नाम से कभी जानी जाती थी।

Language: Hindi
1 Like · 198 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr Meenu Poonia
View all
You may also like:
किधर चले हो यूं मोड़कर मुँह मुझे सनम तुम न अब सताओ
किधर चले हो यूं मोड़कर मुँह मुझे सनम तुम न अब सताओ
Dr Archana Gupta
शून्य से अनन्त
शून्य से अनन्त
The_dk_poetry
जो बातें अंदर दबी हुई रह जाती हैं
जो बातें अंदर दबी हुई रह जाती हैं
श्याम सिंह बिष्ट
ना मुराद फरीदाबाद
ना मुराद फरीदाबाद
ओनिका सेतिया 'अनु '
*सजा- ए – मोहब्बत *
*सजा- ए – मोहब्बत *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
संसद बनी पागलखाना
संसद बनी पागलखाना
Shekhar Chandra Mitra
मर्चा धान को मिला जीआई टैग
मर्चा धान को मिला जीआई टैग
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
হাজার বছরের আঁধার
হাজার বছরের আঁধার
Sakhawat Jisan
-- दिव्यांग --
-- दिव्यांग --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
दिनांक:- २४/५/२०२३
दिनांक:- २४/५/२०२३
संजीव शुक्ल 'सचिन'
तेज़
तेज़
Sanjay ' शून्य'
पूजा
पूजा
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
Cottage house
Cottage house
Otteri Selvakumar
कर
कर
Neelam Sharma
बसंत का मौसम
बसंत का मौसम
Awadhesh Kumar Singh
भीड़ ने भीड़ से पूछा कि यह भीड़ क्यों लगी है? तो भीड़ ने भीड
भीड़ ने भीड़ से पूछा कि यह भीड़ क्यों लगी है? तो भीड़ ने भीड
जय लगन कुमार हैप्पी
महानगर की जिंदगी और प्राकृतिक परिवेश
महानगर की जिंदगी और प्राकृतिक परिवेश
कार्तिक नितिन शर्मा
नये पुराने लोगों के समिश्रण से ही एक नयी दुनियाँ की सृष्टि ह
नये पुराने लोगों के समिश्रण से ही एक नयी दुनियाँ की सृष्टि ह
DrLakshman Jha Parimal
नई बहू
नई बहू
Dr. Pradeep Kumar Sharma
वक्त से वक्त को चुराने चले हैं
वक्त से वक्त को चुराने चले हैं
Harminder Kaur
Colours of heart,
Colours of heart,
DrChandan Medatwal
दिल तड़प उठता है, जब भी तेरी याद आती है,😥
दिल तड़प उठता है, जब भी तेरी याद आती है,😥
SPK Sachin Lodhi
*नृत्य करोगे तन्मय होकर, तो भी प्रभु मिल जाएँगे 【हिंदी गजल/ग
*नृत्य करोगे तन्मय होकर, तो भी प्रभु मिल जाएँगे 【हिंदी गजल/ग
Ravi Prakash
सफलता का मार्ग
सफलता का मार्ग
Praveen Sain
मदहोशी के इन अड्डो को आज जलाने निकला हूं
मदहोशी के इन अड्डो को आज जलाने निकला हूं
कवि दीपक बवेजा
2777. *पूर्णिका*
2777. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
■ तेवरी-
■ तेवरी-
*Author प्रणय प्रभात*
ज़िंदगी को यादगार बनाएं
ज़िंदगी को यादगार बनाएं
Dr fauzia Naseem shad
फुटपाथों पर लोग रहेंगे
फुटपाथों पर लोग रहेंगे
Chunnu Lal Gupta
मेरा नसीब
मेरा नसीब
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
Loading...